नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 का शनिवार को दूसरा दिन रहा, जहां देश-विदेश के राजनीतिक विशेषज्ञ, राजनयिक, नेता, खिलाड़ी और कलाकार एक मंच पर जुटकर वैश्विक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए.
इसी क्रम में आयोजित सत्र ‘AMBASSADORS’ DEBRIEF: Europe & America: The Diplomatic Frontline’ में भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन, इटली के राजदूत एंटोनियो बार्तोली और स्पेन के राजदूत जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल शामिल हुए. इस दौरान यूरोप-अमेरिका संबंधों, वैश्विक राजनीति और बदलती कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा हुई.
सेशन के दौरान तेल से जुड़े अमेरिकी अनुमति के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने कहा कि इटली के अटलांटिक के पार मौजूद देशों के साथ लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं. उन्होंने कहा कि इटली यूरोपीय संघ और नाटो के संस्थापक देशों में शामिल रहा है और यही विरासत उसकी विदेश नीति को संतुलित बनाए रखने में मार्गदर्शन करती है.
बार्तोली ने कहा कि यूरोप हमेशा से संवाद और मध्यस्थता के जरिए मतभेदों को सुलझाने में विश्वास रखता है. उन्होंने अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो का हवाला देते हुए कहा कि मतभेदों के बावजूद यूरोप और अमेरिका को यह समझ है कि वे व्यापक रूप से पश्चिमी दुनिया का हिस्सा हैं. उनके मुताबिक ‘पश्चिम’ कोई एकरूप या काल्पनिक इकाई नहीं, बल्कि साझा पहचान और आपसी जुड़ाव की भावना है, जिसे ईमानदारी, पारदर्शिता और समानता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक राजनीति का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. शीत युद्ध के दौर में जहां यूरोप वैश्विक राजनीति का केंद्र हुआ करता था, वहीं अब ध्यान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ रहा है. उनके अनुसार अमेरिका की विदेश नीति अब पहले की तुलना में अधिक आक्रामक और मुखर होती जा रही है, जबकि उसकी सैन्य प्रतिबद्धताएं भी अधिक चयनात्मक होती दिख रही हैं.