Jalna: किसानों का अनोखा आंदोलन, फूटा गुस्सा.. तो कुएं में लटकाई चारपाई और किया प्रदर्शन

कहने को तो प्रदर्शन के अलग-अलग तरीके होते है. लेकिन महाराष्ट्र में दो किसानों ने आंदोलन करने का ऐसा तरीका अपनाया जिसने हर किसी का ध्यान खींचा.

आंदोलनकारी किसान
गौरव विजय साली
  • जालना,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST

भारत में अक्सर किसान अपनी मांग को लेकर आंदोलन करते हैं. कभी फसलों के दाम को लेकर, तो कभी कर्जमाफी के मुद्दे को लेकर. लेकिन इन आंदोलनों के बीच महाराष्ट्र में एक अनोखे तरीके से हुए  आंदोलन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. दरअसल इस आंदोलन में किसानों ने कुएं के अंदर से प्रदर्शन किया.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल महाराष्ट्र के जालना जिले में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनोखा आंदोलन किया. भोकरदन क्षेत्र में दो किसान सीधे कुएं में खाट (चारपाई) डालकर आंदोलन किया. उन्होंने खाट पर बैठ प्रशासन से अपनी मांग पूरी करने का आग्रह किया. इस अनोखे आंदोलन की चर्चा पूरे इलाके में खूब हुई. 

किसानों की मुख्य मांग?

जिन किसानों ने आंदोलन किया उनका नाम नारायण लोखंडे और विकास जाधव है. दोनों ने एक कुएं में खाट लटकाई और उस पर बैठ गए. जिसपर बैठे-बैठे दोनों ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज किया. किसानों की मांग रही कि राज्य में सभी किसानों की कर्जमाफी की जाए. साथ ही किसानों के सातबारा रिकॉर्ड को कर्जमुक्त कर पूरी तरह कोरा किया जाए. 

आंदोलनकारी किसानों की अन्य मांग

आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए 2 लाख रुपए तक की कर्जमाफी की घोषणा की है, लेकिन इसमें कई शर्तें और नियम लागू किए गए हैं. इन नियमों के कारण कई किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं. इसलिए सरकार को बिना किसी शर्त के सभी किसानों की कर्जमाफी करनी चाहिए, ऐसी मांग आंदोलनकारी किसानों ने की हैं. 

इसके साथ ही किसानों ने मांग की है कि जिन किसानों ने फसल बीमा भरा है, उन्हें तुरंत और पूरा फसल बीमा दिया जाए. किसानों को उनकी उपज का उचित समर्थन मूल्य यानी गारंटी भाव मिले, खाद के लिए शुरू की गई ऑनलाइन प्रक्रिया बंद कर ऑफलाइन व्यवस्था लागू की जाए. 

किसानों ने गाय गोठा, वृक्षारोपण और सिंचाई कुओं के लिए मिलने वाली योजनाओं का कुशल और अकुशल निधि भी जल्द से जल्द वितरित करने की मांग की है. आंदोलन के दौरान किसानों ने प्रशासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद यह आंदोलन वापस लिया गया.

 

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