scorecardresearch

Railway rules for passengers: ट्रेन में सफर करने से पहले जान लें रेलवे के ये जरूरी नियम, यात्रा होगी सुरक्षित और आरामदायक

रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई नियम बनाए हैं. इन नियमों की जानकारी होने से आप अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका लाभ भी उठा सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं इन नियमों के बारे में...

railway rules for passenger railway rules for passenger

भारत में हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. रेलवे देश की सबसे बड़ी और सबसे भरोसेमंद परिवहन सेवाओं में से एक है. सस्ता किराया, लंबी दूरी की सुविधा और आरामदायक यात्रा के कारण लोग बड़ी संख्या में ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, कई यात्रियों को रेलवे के कुछ महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी नहीं होती. ऐसे में सफर के दौरान उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई नियम बनाए हैं. इन नियमों की जानकारी होने से आप अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका लाभ भी उठा सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं इन नियमों के बारे में...

रात में महिला या बच्चे को ट्रेन से नहीं उतारा जा सकता
रेलवे नियमों के अनुसार अगर कोई अकेली महिला या नाबालिग बच्चा बिना टिकट यात्रा करते हुए पाया जाता है, तो उसे रात के समय किसी स्टेशन पर जबरन ट्रेन से नहीं उतारा जा सकता. यह नियम उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यदि किसी महिला या बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, तो वे रेलवे हेल्पलाइन या अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं.

रात 10 बजे के बाद टीटीई नहीं जगा सकता
रेलवे ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक का समय यात्रियों के आराम के लिए निर्धारित किया है. इस दौरान टीटीई सामान्य परिस्थितियों में केवल टिकट जांचने के लिए किसी सो रहे यात्री को नहीं जगा सकता. हालांकि, जो यात्री रात में किसी स्टेशन से ट्रेन में चढ़ते हैं, उनके टिकट की जांच इस समय भी की जा सकती है.

मिडिल बर्थ खोलने का नियम
स्लीपर और एसी थ्री-टियर कोच में मिडिल बर्थ को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलता है. रेलवे के नियम के मुताबिक मिडिल बर्थ रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही खोली जा सकती है. दिन में नीचे वाली सीट पर बैठे यात्रियों को बैठने का पूरा अधिकार होता है. ऐसे में दिन के समय मिडिल बर्थ खोलकर बैठने की जगह रोकना नियमों के खिलाफ माना जाता है.

ट्रेन छूट जाए तो सीट तुरंत नहीं जाती
कई यात्रियों को लगता है कि अगर वे अपनी बोगी में समय पर नहीं पहुंच पाए, तो उनकी सीट किसी और को दे दी जाएगी. लेकिन ऐसा तुरंत नहीं होता. यदि यात्री किसी दूसरी बोगी में चढ़ गया है, तो वह बाद में अपनी सीट तक पहुंच सकता है. टीटीई भी कुछ स्टेशनों तक यात्री के आने का इंतजार करता है.

जरूरत पड़ने पर बढ़ा सकते हैं यात्रा
अगर सफर के दौरान आपको तय स्टेशन से आगे जाना हो, तो रेलवे यह सुविधा देता है. यात्री टीटीई से संपर्क कर अतिरिक्त किराया जमा करके अपनी यात्रा आगे बढ़ा सकता है. इससे नया टिकट लेने की जरूरत नहीं पड़ती.

रात में शोर करना नियमों के खिलाफ
रेलवे यात्रियों के आराम का विशेष ध्यान रखता है. रात के समय मोबाइल पर तेज आवाज में गाने सुनना, वीडियो चलाना या स्पीकर पर बात करना दूसरे यात्रियों को परेशान कर सकता है. ऐसी स्थिति में शिकायत भी की जा सकती है. इसलिए हेडफोन या इयरफोन का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है.

आरपीएफ और जीआरपी की जिम्मेदारी
आरपीएफ और जीआरपी का मुख्य काम यात्रियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है. टिकट जांचने का अधिकार केवल अधिकृत रेलवे कर्मचारियों और टीटीई के पास होता है. यदि कोई व्यक्ति टिकट चेकिंग के नाम पर परेशान करता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है.

रेलवे के इन नियमों की जानकारी यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से बचा सकती है. अपने अधिकारों को जानकर आप सुरक्षित, आरामदायक और बेहतर यात्रा का अनुभव ले सकते हैं. इसलिए अगली बार ट्रेन से सफर करने से पहले इन जरूरी नियमों को जरूर याद रखें.
 

ये भी पढ़ें: