भारत में आजादी का जश्न मनाने को लेकर तैयारी जोर-शोर से चल रही है. इस साल भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था. इस आजादी के लिए भारत माता के अनगिनत वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी. आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर आजादी के लिए 15 अगस्त का ही दिन क्यों तय किया गया, जबकि पहले इसकी योजना कुछ और ही बनाई गई थी.
आजादी के लिए पहले कौन सी तारीख हुई थी तय
भारत को आजाद करने के लिए ब्रिटिश शासन ने जून 1948 तक का समय रखा था. ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने 20 फरवरी 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में ऐलान किया था कि ब्रिटिश सरकार 30 जून 1948 तक सत्ता भारतीय हाथों में सौंपकर भारत से वापस लौट जाएगी.
माउंटबेटन को दी गई थी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
ब्रिटिश शासन ने लॉर्ड लुई माउंटबेटन को भारत में सत्ता का हस्तांतरण करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को सौंपा था. माउंटबेटन मार्च 1947 में भारत के अंतिम वायसराय बनकर दिल्ली आए था. 3 जून 1947 को एक बड़ी योजना घोषित की गई. इसे 3 जून योजना या माउंटबेटन योजना कहा जाता है. इस योजना के मुताबिक ब्रिटिश भारत को दो देशों भारत और पाकिस्तान में बांटा जाना था. कांग्रेस ने इस योजना को भारी मन से स्वीकार किया था. मुस्लिम लीग ने भी इसे स्वीकार किया था. इसके बाद आजादी की तारीख जल्द तय करनी थी.
कैसे तय हुई आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख
आपको मालूम हो कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश प्रशासन की एक तरह से कमर तोड़ दी थी. इसके बाद द्वितीय विश्वयुद्ध के खत्म होते ही नौसेना विद्रोह, श्रमिक आंदोलनों और भारतीय सैनिकों के भीतर बढ़ते असंतोष ने अंग्रेजी सरकार को यह समझा दिया था कि अब भारत पर ज्यादा दिन तक हुकूमत चलाना संभव नहीं है. इसके अलावा माउंटबेटन जब भारत आए थे तो उस समय भारत में हिंदू-मुस्लिम तनाव चरम पर था. जगह-जगह हिंसा हो रही थी. कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच भी सत्ता-विभाजन पर सहमति नहीं बन रही थी. ऐसे में माउंटबेटन ने भारत को आजाद करने का जल्दी निर्णय लेने का रास्ता चुना.
उन्होंने सोचा कि जून 1948 तक इंतजार करने पर स्थिति और खतरनाक व बेकाबू हो सकती है. आपको मालूम हो कि 15 अगस्त का दिन आजादी देने का पूरा फैसला लॉर्ड माउंटबेटन का था. माउंटबेटन ने बाद में कहा था कि उन्होंने 15 अगस्त का दिन इसलिए चुनी क्योंकि यह उनके लिए भाग्यशाली दिन था. यह जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी वर्षगांठ थी. 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण स्वीकार करने की घोषणा की थी. माउंटबेटन द्वितीय विश्वयुद्ध में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के मित्र राष्ट्रों के सर्वोच्च कमांडर रहे थे. जापान की हार उनके सैन्य जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी. ऐसे में 15 अगस्त उनके लिए एक शुभ और यादगार तारीख थी. भारत की आजादी का मुख्य समारोह 14 और 15 अगस्त 1947 की आधी रात को संविधान सभा में आयोजित हुआ. संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण दिया.