जून के पहले आधे हिस्से में बारिश बेहद कमजोर रही थी. कई राज्यों में खेत सूखे थे, बुवाई में मुश्किल आ रही थी लेकिन जुलाई की शुरुआत में मानसून ने जोरदार वापसी की है. लगातार हो रही बारिश से देशभर में बारिश की कमी काफी हद तक कम हो गई है और खेती के लिए हालात पहले से बेहतर हो गए हैं.
जून में क्यों बढ़ गई थी चिंता?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 4 जून से 7 जुलाई के बीच देश में सामान्य तौर पर 213.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान 164.3 मिमी बारिश दर्ज की गई. यानी अभी भी बारिश सामान्य से 23% कम है. हालांकि राहत की बात यह है कि करीब एक सप्ताह पहले तक यह कमी लगभग 40% के आसपास पहुंच गई थी. यानी कुछ ही दिनों में अच्छी बारिश के कारण बारिश का घाटा तेजी से कम हुआ है. दरअसल, जून के पहले पखवाड़े में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. कई इलाकों में बादल तो पहुंचे, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हुई. इससे खेती, पेयजल और बिजली उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी थीं.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा राहत मिली?
पिछले कुछ दिनों में मानसून ने मध्य, पश्चिमी और उत्तरी भारत में तेजी से दस्तक दी. इसका सबसे ज्यादा फायदा उन राज्यों को मिला जहां खरीफ फसलों की बुवाई का समय चल रहा है.
इन राज्यों में अब सामान्य के करीब बारिश दर्ज की गई है-
महाराष्ट्र
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
ओडिशा
तेलंगाना
आंध्र प्रदेश
पश्चिम बंगाल
इन राज्यों में लगातार बारिश होने से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है.
किन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई?
जम्मू-कश्मीर
हिमाचल प्रदेश
सिक्किम
लक्षद्वीप
अंडमान एवं निकोबार
इन राज्यों में अभी भी बारिश की कमी
मानसून की वापसी के बावजूद देश के कई हिस्सों में अभी भी सामान्य से कम बारिश हुई है.
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
गुजरात
पंजाब
हरियाणा
दिल्ली
उत्तराखंड
कर्नाटक
केरल
पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य
विशेष रूप से मणिपुर में अब भी बारिश का बड़ा घाटा बना हुआ है. यदि आने वाले दिनों में यहां अच्छी बारिश नहीं होती है तो खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है.
आगे कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक सप्ताह तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना रहेगा. पश्चिमी तट, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ कुछ दिनों की अच्छी बारिश से पूरे सीजन की कमी पूरी नहीं होगी. जून के पहले हिस्से में जो बारिश का बड़ा घाटा बना था, उसे पूरी तरह खत्म करने के लिए पूरे जुलाई महीने में लगातार सामान्य या उससे अधिक बारिश होना जरूरी है.
दिल्ली में बारिश क्यों नहीं हो रही?
दिल्ली में मानसून पहुंचने के बावजूद लगातार अच्छी बारिश नहीं हो रही. इसकी कई मौसम संबंधी वजहें हैं.
1. मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) दिल्ली से दूर है
मानसून की मुख्य बारिश मानसून ट्रफ के आसपास होती है. पिछले कुछ दिनों में यह ट्रफ दिल्ली से दूर मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य हिस्सों की ओर बनी रही, इसलिए बारिश का मुख्य सिस्टम दिल्ली तक नहीं पहुंच पाया.
2. लो प्रेशर सिस्टम का असर नहीं मिला
बंगाल की खाड़ी और आसपास बनने वाले लो प्रेशर सिस्टम जब उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हैं, तभी दिल्ली में अच्छी बारिश होती है. इस बार ऐसे सिस्टम का प्रभाव मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों पर ज्यादा रहा.
3. मानसून का 'ब्रेक' जैसा पैटर्न
मानसून पूरे सीजन में एक जैसा सक्रिय नहीं रहता। कुछ दिनों तक एक क्षेत्र में भारी बारिश होती है, जबकि दूसरे हिस्से में बारिश कम हो जाती है। फिलहाल दिल्ली ऐसे ही कम बारिश वाले चरण से गुजर रही है.