24 साल जेल में रहा बेगुनाह, 'आजाद' की रुला देने वाली कहानी

मां बाप ने उसका नाम आजाद खान रखा था लेकिन कानून की एक चूक ने उससे ,उसके नाम का मतलब ही छीन लिया. आजाद खान पर लगा एक आरोप और जवानी के 24 साल जेल के अंदर बीत गए. असल कहानी यहां से सुरु होती है की साल 2000 में एक दिन पुलिस आजाद खान के घर आती है और बताती है कि उस पर डकैती का आरोप है. यह सुनकर आजाद खान के पैरों तले जमीन निकल जाती है.

मैनपुरी के आजाद खान की रुकी रही रिहाई
gnttv.com
  • मैनपुरी ,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

मैनपुरी के रहने वाले आजाद खान थाना अलाऊ के ज्योति कतारा क्षेत्र का रहने वाला था. उस पर डकैती का आरोप लगा था, जिसमें अपर सत्र न्यायाधीश मैनपुरी ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. उसे धारा 395- 397 में आजीवन कारावास में दणित किया गया था. भाई मस्तान ने मजदूरी कर के उसकी पैरवी हाई कोर्ट में की और उसकी का यह नतीजा निकला कि न्यायालय ने माना कि सिर्फ इक- इक़बालिया बयान काफी नहीं था. अभियोजन पक्ष और पुलिस कोई भी आरोपी के खिलाफ साक्ष्य नहीं दिखा सकी, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे जे मुनीर द्वारा 19 दिसंबर 2025 को दोषमुक्त का आदेश निर्गत किया गया. लेकिन उसकी रिहाई में एक पेच फस गया क्योंकि उच्च न्यायालय द्वारा धारा 437 ए की कार्रवाई सत्र न्यायालय में संबंधित किए जाने हेतु निर्देशित किया था जिसमें आजाद खान को 20-20 हजार के दो जमानतदारों को पेश करना था.

दोष मुक्त होने के बावजूद नहीं मिली रिहाई 
लेकिन आजाद बंदी द्वारा धारा 437 ए की कार्रवाई पूर्ण न किए जाने के कारण न्यायालय मैनपुरी द्वारा रिलीज़ आर्डर जारी नहीं किया गया. इसके चलते 19 दिसंबर 2025 को डकैती के आरोप से दोष मुक्त होने के बावजूद आजाद खान जेल की सलाखों से बाहर नहीं आ पाया. इस कारण जेल प्रशासन द्वारा बन्दी को रिहा किया जाना संभव नहीं हो सका. बरेली केंद्रीय कारागार के सीनियर जेलर नीरज कुमार ने बताया कि बंदी पर एक अन्य वाद धारा 307 का भी केस लंबित है. इस केस में 10 साल की सजा तथा 7000 रुपए का जुर्माना है. जुर्माना न अदा करने पर 1 वर्ष की सजा से भी दंडित है, सजा पूरी हो चूकि है लेकिन यह जुर्माना अदा नहीं किया गया था जिसके कारण डकैती के आरोप में दोष मुक्त होने के बावजूद आजाद खान को 1 साल और जेल के अंदर रहना पड़ता

7000 रुपयों के लिए रुकी रही रिहाई  
उच्च न्यायालय द्वारा 19 दिसंबर 2025 को दोषमुक्त का आदेश होने के बाद भी कागजी कार्यवाही अटकने से 1 महीने से ज्यादा समय जेल में रहना पड़ा. आजतक ने कल इसके बारे में पड़ताल सुरु की तब मीडिया की हलचल के बाद आनंन -फानन में शासन से लेकर बरेली केंद्रीय कारागार तक हड़कंप मच गया. जेल सुपरिंटेंडेंट अविनाश गौतम ने कल न्यायालय में प्रार्थना पत्र भिजवाए और ईमेल के जरिए ही निवेदन किया इसके बाद औपचारिकताएं पूरी करते हुए मैनपुरी सत्र न्यायालय और सरकारी वकील के प्रयास से आजाद खान की रिहाई के आदेश ईमेल के जरिए बरेली के सेंट्रल जेल पहुंच सके लेकिन आजाद की आजादी के बीच अभी एक अड़चन और थी उस पर और उसके परिवार पर जुर्माने के ₹ 7000 नहीं थे. तब एक संस्था छोटी सी आशा की पारुल मलिक और रुपाली गुप्ता सामने आई और उन्होंने जुर्माने की रकम जमा कर आजाद की आजादी पक्की की.

रात में ही सेंट्रल जेल बरेली में उसके भाई मस्तान के उसे सुपुर्द कर दिया, जिसका वीडियो भी जेल प्रशासन द्वारा जारी किया गया. इस तरह 14 साल बेगुनाह होने के बावजूद भी आजाद खान को कैद रहना पड़ा. 

(रिपोर्ट- कृष्ण गोपाल राज)

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