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सिर्फ समय नहीं, भारत की विरासत भी बताएंगी ये घड़ियां, जयपुर की अनोखी पहल ने जीता लोगों का दिल

समय देखने वाली घड़ियां अब सिर्फ वक्त नहीं बता रहीं, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत की कहानी भी सुना रही हैं. जयपुर की एक वॉच कंपनी ने ऐतिहासिक दरवाजों, प्राचीन सिक्कों, डाक टिकटों और पारंपरिक भारतीय कला को घड़ियों के डायल पर उतारकर इतिहास और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम पेश किया है. कंपनी के नए 'गेट्स ऑफ इंडिया' और 'प्रीमियम बाघ' कलेक्शन भारतीय संस्कृति, स्थापत्य और शिल्पकला को दुनिया के सामने नए अंदाज में पेश कर रहे हैं.

watch company's Unique collection
रिदम जैन
  • जयपुर ,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:08 PM IST

मिस्र अपनी पिरामिडों से पहचाना जाता है, रोम अपने मेहराबों से और भारत… अपने भव्य दरवाज़ों से। ये सिर्फ प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सभ्यता के गवाह हैं. अब इन्हीं ऐतिहासिक दरवाजों और भारतीय विरासत को समय के साथ जोड़ने की एक अनोखी कोशिश जयपुर में देखने को मिल रही है, जहां घड़ियां सिर्फ समय नहीं बता रहीं, बल्कि भारत की कहानी भी सुना रही हैं.

जयपुर में 2013 में शुरू हुई जयपुर वॉच कंपनी पिछले 13 वर्षों से भारतीय इतिहास, कला और परंपरा को घड़ियों के डायल पर उतारने का काम कर रही है. अब तक 150 से अधिक लिमिटेड एडिशन कलेक्शन तैयार किए जा चुके हैं. खास बात यह है कि हर कलेक्शन किसी न किसी भारतीय विरासत, शिल्प या ऐतिहासिक पहचान से प्रेरित है. पुराने भारतीय सिक्कों, डाक टिकटों, पासपोर्ट स्टाम्प, मोर पंख, हैंड पेंटिंग, राजस्थानी मिनिएचर आर्ट, मीनाकारी और कुंदन-पोल्की जैसी पारंपरिक कलाओं को भी घड़ियों का हिस्सा बनाया गया है.

ऐतिहासिक वास्तुकला को समर्पित
इसी श्रृंखला में दो नए कलेक्शन 'गेट्स ऑफ इंडिया' और 'प्रीमियम बाघ' लॉन्च किए गए हैं. 'गेट्स ऑफ इंडिया' भारत की ऐतिहासिक वास्तुकला को समर्पित है. जयपुर के सिटी पैलेस के प्रसिद्ध लोटस गेट और लहरिया गेट से प्रेरित इस कलेक्शन में मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया, दिल्ली का इंडिया गेट, लाल किला और हैदराबाद का चारमीनार भी शामिल हैं. इसकी सबसे अनोखी विशेषता 360 डिग्री फ्लिप मैकेनिज्म है. घड़ी को पलटते ही दोनों तरफ अलग-अलग डायल दिखाई देते हैं. एक तरफ रंगीन विरासत की झलक मिलती है तो दूसरी तरफ उसी स्मारक का क्लासिक मदर-ऑफ-पर्ल रूप. साथ ही इसमें दो अलग-अलग टाइम जोन देखने की सुविधा भी दी गई है. इस कलेक्शन के जरिए उन स्थापत्य बारीकियों को भी उकेरने की कोशिश की गई है, जो विशाल दरवाज़ों को देखने के बावजूद अक्सर लोगों की नजर से छूट जाती हैं.

घड़ी को तैयार होने में करीब सात सप्ताह का समय
वहीं 'प्रीमियम बाघ' कलेक्शन राजस्थान की कला और प्रकृति से प्रेरित है. डायल पर सुनहरे बाघ की आकृति, फिरोजा, टाइगर्स आई, एवेंच्‍यूरिन और एबेलोन जैसे प्राकृतिक पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. खादी के मसलिन कपड़े, राजपूती छतरियां, रूबी और महीन फिलिग्री वर्क इस घड़ी को पारंपरिक शिल्प से जोड़ते हैं, जबकि अंदर स्विस और जापानी ऑटोमैटिक मूवमेंट जैसी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की गई है. हर घड़ी को तैयार होने में करीब सात सप्ताह का समय लगता है.

इन दो कलेक्शन के अलावा भी वर्षों से कई अनोखे प्रयोग किए जाते रहे हैं. कहीं पुराने एक रुपये, 50 पैसे और चार आने के सिक्कों को डायल बनाया गया तो कहीं पासपोर्ट स्टाम्प और डाक टिकटों को. महिलाओं के लिए तैयार ब्राइडल कलेक्शन में मीनाकारी, कुंदन-पोल्की और पारंपरिक ज्वेलरी की झलक दिखाई देती है, जबकि हैंड पेंटेड डायल भारतीय कलाकारों की बारीक कारीगरी को सामने लाते हैं.

संस्थापक गौरव मेहता का मानना है कि घड़ी केवल समय बताने वाला उपकरण नहीं, बल्कि पहनने वाले के व्यक्तित्व का हिस्सा होती है. यही वजह है कि यहां कई घड़ियां पूरी तरह कस्टमाइज भी की जाती हैं, जिनमें ग्राहक अपनी यादों, पुराने सिक्कों, मोनोग्राम या व्यक्तिगत महत्व की चीज़ों को शामिल करा सकते हैं। ‘मेक इन इंडिया’ की सोच के साथ तैयार की जा रही ये घड़ियां दिखाती हैं कि आधुनिक वॉच मेकिंग में भी भारतीय विरासत को नए अंदाज में दुनिया के सामने रखा जा सकता है.
 

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