15 लाख या लड़की दो, नहीं तो पत्नी नहीं मिलेगी... जोधपुर में फिर चर्चा में आया आटा साटा प्रथा, जान लें इसके बारे में

राजस्थान के जोधपुर में एक युवती को उसके पिता सिर्फ इसलिए मायके लेकर आ गए, क्योंकि उसके पति ने आटा साटा प्रथा के तहत अपने साले की शादी कराने से इनकार कर दिया. ससुर ने बेटी की शादी दूसरी जगह करा दी. इसके बाद पति कोर्ट पहुंचा और केस दर्ज कराया. राजस्थान हाईकोर्ट भी आटा साटा प्रथा को लेकर कड़ी टिप्पणी कर चुका है.

Jodhpur News
अशोक शर्मा
  • जोधपुर,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:17 PM IST

आटा साटा प्रथा मारवाड़ में कई वैवाहिक परिवारों को खराब कर चुकी है. लेकिन यह रुक नहीं रही है. हाल ही में हाई कोर्ट ने इसको लेकर बेहद सख्ती दिखाते हुए बेटी को सौदे की वस्तु मानने पर एतराज जताया था. अब एक और मामला सामने आया है, जिसमें बेटी के ससुराल वालों ने उसके भाई की शादी नहीं करवाई तो पिता बेटी को पति के घर से शादी के करीब डेढ़ साल बाद वापस ले आया. इसको लेकर पीड़ित पति प्रमोद प्रजापत ने प्रतापनगर थाने में मामला न्यायालय के मार्फत मामला दर्ज करवाया है. थानाधिकारी भवानी सिंह ने बताया कि पति प्रमोद कुमार प्रजापत द्वारा न्यायालय में पेश इस्तगासे पर आदेश से मामला दर्ज कर जांच की जा रही है.

15 लाख या लड़की दो, नहीं तो पत्नी नहीं मिलेगी-
रिपोर्ट में बताया कि प्रमोद प्रजापत का विवाह नवंबर 2023 में पोकरराम की पुत्री लीला से हुआ था. विवाह के एक से डेढ वर्ष तक सही ढंग से आना जाना रहा था. विवाह से पहले दोनों परिवार में किसी प्रकार की कोई शर्त नहीं थी कि परिवादी के साले की सगाई करवानी होगी. लेकिन  कुछ समय बाद ही प्रमोद के ससुर ने उसके पिता से कहा कि मेरे पुत्र नरेश की सगाई करवाओ नहीं तो मेरी बेटी लीला को मैं वापस अपने घर ले जाउंगा. जुलाई 2025 में पोकरराम और अन्य लोग प्रमोद  के घर आए और कहा कि या तो आटा साटा के लिए लड़की दो या पोकरराम को 15 लाख रूपए दो, दोनों में से एक काम करना पड़ेगा नहीं तो हम अपनी पुत्री को ले जाएंगे. परिवादी व परिवादी के परिवार वालों ने पैसे देने से मना करने पर प्रमोद की पत्नी लीला को लेकर चले गए. जाते समय कहा कि 15 लाख लेकर आना और लीला को ले जाना नहीं तो परिवार की बहू को भूल जाना.

शर्त नहीं मानने पर बेटी की शादी दूसरे से कराई-
लीला के जाने के बाद प्रमोद के परिवार ने पोकरराम से कई बार संपर्क किया, उनके घर गए. लेकिन उनसे साफ कहा गया कि या तो 15 लाख रुपए या फिर आटा साटा के तहत मेरे बेटे की अपने परिवार में सगाई करवाओ. लेकिन बात नहीं बनी. इस वर्ष फरवरी में पोकरराम ने अपनी बेटी की शादी मुकेश नामक व्यक्ति से कर उसके साथ भेज दिया. इसको लेकर प्रमोद ने पहले रिपोर्ट दी, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ तो कोर्ट से आदेश कर केस दर्ज करवाया. जिसमें ससुर द्वारा उसकी पत्नी का रकम लेकर किसी दूसरे के साथ विवाह कर भेजने का आरोप लगाया है.

आटा-साटा प्रथा पर कोर्ट जता चुका है नाराजगी-
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस वर्ष मई में एक मामले की सुनवाई के बाद आदेश सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आटा-साटा प्रथा पर बेटियों को वैवाहिक सौदेबाजी का माध्यम नहीं बनाया जा सकता. खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि एक बेटी किसी दूसरे बेटे की शादी की गारंटी नहीं हो सकती. न्यायाधीश अरुण मोंगा और न्यायाधीश सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री पारित करते हुए बीकानेर फैमिली कोर्ट के 24 सितंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया.

खंडपीठ ने कहा कि जिसे परंपरा बताया जाता है, वह वास्तव में मानव जीवन का लेन-देन है. एक बालिका किसी पारस्परिक सौदे की कीमत नहीं हो सकती और बेटी किसी दूसरे बेटे के विवाह की गारंटी नहीं है. बचपन से दबाव और सामाजिक शर्त के बाद बालिग होने पर दी गई सहमति को स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि ऐसी प्रथाएं बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन हैं और इन्हें अस्वीकार किया जाना चाहिए.

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