गुजरात के जूनागढ़ का गिर सासन सिर्फ एशियाटिक शेरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी कला के लिए भी पहचान बना रहा है. यहां यूनिक थ्रेड आर्ट तैयार की जाती है, जिसमें छोटी-छोटी कीलों और रंग-बिरंगे धागों की मदद से अद्भुत तस्वीरें बनाई जाती हैं. इस कला को देख मंत्रमुग्ध सैलानी शेरों की तस्वीरें थ्रेड आर्ट से बनवाकर अपने साथ ले जाते हैं. इस कला ने इलाके को ना सिर्फ नई पहचान, बल्कि रोजगार भी दिया है.
लगातार बढ़ रही थ्रेड आर्ट की लोकप्रियता-
पिछले 20 से 25 सालों से यहां थ्रेड आर्ट पसंद करने वाले लगातार बढ़ गए हैं. लकड़ी के बोर्ड पर हजारों छोटी कीलें लगाकर रंगीन धागों को एक खास डिजाइन में जोड़कर तैयार होती है.
सोमनाथ मंदिर, राममंदिर, भगवान शिव, गणेश जी, खोडियार माताजी, सरदार पटेल और गौतम बुद्ध की तस्वीरों को थ्रेड आर्ट कलाकार बेहद बारीकी और खूबसूरती से तैयार करते हैं. थ्रेड आर्टिस्ट बताते हैं कि गिर घूमने आने वाले देश-विदेश के पर्यटक इस कला को यादगार रुप में ले जाना पसंद करते हैं.
डिमांड पर भी तैयार होती है डिजाइन-
कलाकार बताते हैं कि अगर कोई ग्राहक किसी विशेष तस्वीर या कमर्शियल डिजाइन की मांग करते हैं तो उसे भी तैयार किया जाता है. यानी धागों और कीलों से किसी भी कल्पना को आकार देना ही इनका ये हुनर है.
600 से 15 हजार तक आर्ट की कीमत-
खास बात ये है कि इसमें धैर्य, मेहनत और रचनात्मकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है. एक तस्वीर को तैयार करने में कई घंटे से लेकर कई दिन तक का समय लग जाता है. इस आर्ट की कीमत लगभग 600 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक होती है.
युवाओं ने बनाया रोजगार का जरिया-
यहां करीब 20 युवा इस कला को अपने रोजगार का जरिया बना चुके हैं. ये कला अब गिर की एक खास पहचान बन चुकी है. एशियाटिक शेरों को देखने आने वाले पर्यटक यहां शेर हकीकत में देखने के बाद एशियाटिक शेरों को इस कला के जरिए तस्वीर के रुप में अपने साथ ले जाते हैं. यानी एशियाटिक शेरों ने थ्रेड आर्ट को भी गिर की सांस्कृतिक पहचान का एक खास हिस्सा बना दिया है.
(भार्गवी जोशी की रिपोर्ट)
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