कर्नाटक कैबिनेट ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सोशल मीडिया एनालिटिक्स सिस्टम को मंजूरी दी है. इस परियोजना की अनुमानित लागत 67.20 करोड़ रुपये रखी गई है. सरकार का मानना है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है.
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से फर्जी खबरों पर रोक
यह AI आधारित सिस्टम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट्स और अन्य डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों की रियल-टाइम निगरानी करेगा. इसका मकसद फर्जी खबरें, गलत जानकारी, नफरत फैलाने वाली पोस्ट, ऑनलाइन होने वाली गलत व्यवहार और साइबर खतरों को तुरंत पहचान कर उन पर रोक लगाना है. डिजिटल कंटेंट इतनी तेज मात्रा में बढ़ चुकी है कि पहले के तरीके से की जाने वीली निगरानी अब पर्याप्त नहीं माने जा रहे. इसी वजह से सरकार ने उन्नत तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है.
बड़े डेटा का विश्लेषण, तेज कार्रवाई की तैयारी
यह सिस्टम बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा का विश्लेषण करेगा. इससे संभावित खतरों को जल्दी पहचानने और समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी. सरकार का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
तकनीकी प्रक्रिया और लागू करने की योजना
परियोजना की तकनीकी जरूरतों को अंतिम रूप देने का काम टेंडर अप्रूवल कमेटी करेगी. इसके बाद ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए सिस्टम को लागू किया जाएगा. इससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी.
डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में कदम
कैबिनेट का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह पहल जरूरी है. यह सिस्टम राज्य की डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगा और जिम्मेदार डिजिटल माहौल बनाने में मदद करेगा.
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस कदम का उद्देश्य ऑनलाइन माहौल को सुरक्षित बनाना है. इससे गलत सूचना और डिजिटल खतरों पर तेजी से नियंत्रण संभव होगा, जिससे समाज में भ्रम और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है.
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