पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है शुभेंदु अधिकारी. जो बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे. 57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी ने 2026 विधानसभा चुनाव में ऐसा राजनीतिक दांव खेला, जिसने बंगाल की राजनीति का समीकरण ही बदल दिया. नेता प्रतिपक्ष के रूप में पिछले पांच वर्षों से लगातार ममता सरकार पर हमलावर रहे शुभेंदु ने इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले भवानीपुर सीट पर हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया.
2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने 2026 में भवानीपुर में भी टीएमसी सुप्रीमो को मात देकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर दी. भवानीपुर सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया. वहीं अपनी दूसरी सीट नंदीग्राम में उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर को 9,665 वोटों के अंतर से हराया.
कांग्रेस से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था. वर्ष 1995 में वह कांथी नगरपालिका से पार्षद चुने गए थे. उस समय अधिकारी परिवार कांग्रेस की राजनीति से जुड़ा हुआ था. बाद में जब ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस बनाई, तब पूर्वी मिदनापुर का अधिकारी परिवार भी टीएमसी के साथ आ गया. शुभेंदु के पिता तीन बार सांसद रहे और यूपीए-2 सरकार में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री भी बने.
शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान उभरा. उस समय वह विधायक थे और उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व किया. इसी आंदोलन ने बंगाल में 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार की नींव हिला दी थी और 2011 में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई.
लोकसभा से विधानसभा तक लगातार बढ़ता गया कद
2009 में शुभेंदु अधिकारी ने तमलुक लोकसभा सीट से सीपीएम के दिग्गज नेता लक्ष्मण सेठ को 1.73 लाख वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की. इसके बाद 2014 में वह दोबारा सांसद चुने गए. यूपीए-1 और यूपीए-2 के दौरान वह संसद में सक्रिय चेहरा रहे. फिर 2016 में उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट जीती और ममता सरकार में परिवहन मंत्री बनाए गए.
अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से बढ़ी दूरी
एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद दूसरा सबसे ताकतवर नेता माना जाता था. लेकिन धीरे-धीरे पार्टी में अभिषेक बनर्जी का प्रभाव बढ़ने लगा. राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी कि पार्टी के भीतर शुभेंदु का कद कम किया जा रहा है. आखिरकार नवंबर 2020 में उन्होंने परिवहन और सिंचाई मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
BJP में शामिल होकर बदला बंगाल का राजनीतिक खेल
दिसंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी भाजपा में शामिल हो गए. चुनाव से ठीक पहले उनका टीएमसी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना गया. 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. हालांकि भाजपा सत्ता तक नहीं पहुंच सकी और 77 सीटों पर सिमट गई, लेकिन शुभेंदु अधिकारी नेता प्रतिपक्ष बने और अगले पांच वर्षों तक विधानसभा से लेकर सड़कों तक ममता सरकार के खिलाफ आक्रामक राजनीति करते रहे.
कितने के मालिक हैं शुभेंदु अधिकारी?
शुभेंदु कोई बड़ी संपत्ति के मालिक नहीं हैं. चुनाव के दौरान जमा किए गए हलफनामे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी की कुल घोषित संपत्ति लगभग 85 लाख 87 हजार रुपए है. जिनके पास चल संपत्ति लगभग 24 लाख 57 हजार रुपए है. इसमें लगभग ₹12,000 की नकद राशि है. यानी शुभेंदु अधिकारी के पास केवल 12 हजार रुपए कैश है. उनकी अचल संपत्तियों का मूल्य लगभग 61 लाख 30 हजार रुपए है.
इसमें मुख्य रूप से कृषि भूमि, गैर कृषि प्लॉट और तीन आवासीय संपत्ति शामिल हैं. वहीं शुभेंदु अधिकारी के पास ना तो कोई निजी कार है ना किसी तरह का गोल्ड है. यहां तक कि मोटरसाइकिल तक शुभेंदु अधिकारी के नाम पर नहीं है, ना ही किसी तरह का कर्ज है.