मिलिए किसान आंदोलन की असली वीरांगनाओं से जो कह रही हैं- चूल्हा-चौका नहीं संभालना, अब हम संसद जाएंगे

इसी बीच सिंघु बार्डर से महिलाओं की कुछ ऐसी तस्वीरें आई हैं, जो मुस्कान के पीछे संभावनाएं दर्शाती मालूम पड़ रही हैं. सालों से किसानों के गुस्से और मांग की तस्वीर दिखा रहे सिंघु बार्डर से आई  आज ये तस्वीरें बेहद ही खास हैं. चेहरे पर मुस्कुराहट लिए सेल्फी लेती महिला ब्रिगेड, और वहां पर मौजूद महिलाओं के चेहरे पर वो जज्बा साफ नजर आ रहा है जो ये बताने के लिए काफी है कि वाकई में ये लड़ाई इन महिलाओं की भी थी.

सिंघु बार्डर पर जश्न मनाती महिलाएं
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 09 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST
  • सिंघु बार्डर पर दिख रही महिलाओं में खुशी
  • बोली- अब चूल्हा चौका नहीं संभालेंगे

सिंघु बॉर्डर पर आज सुबह से ही अलग तरह का माहौल है. किसानों की गर्मजोशी को देख कर ऐसा लग रहा है जैसे उन्होंने अपनी जीत पर मुहर लगा दी है. सारे किसान खुशी -खुशी अपने घर की तरफ कूच कर रहे हैं. इसी बीच सिंघु बार्डर से महिलाओं की कुछ ऐसी तस्वीरें आई हैं, जो मुस्कान के पीछे संभावनाएं दर्शाती मालूम पड़ रही हैं. सालों से किसानों के गुस्से और मांग की तस्वीर दिखा रहे सिंघु बार्डर से आई  आज ये तस्वीरें बेहद ही खास हैं. चेहरे पर मुस्कुराहट लिए सेल्फी लेती महिला ब्रिगेड, और वहां पर मौजूद महिलाओं के चेहरे पर वो जज्बा साफ नजर आ रहा है जो ये बताने के लिए काफी है कि वाकई में ये लड़ाई इन महिलाओं की भी थी. 

'अब हमने बॉर्डर और टोल नाप लिए हैं, आगे और आंदोलन करेंगे'

महिला ब्रिगेड में मौजूद एक महिला बताती है आज हम ठीक वैसा ही महसूस कर रहे हैं जैसे कोई फौजी सालों बाद अपने घर लौट आया हो. महिला ब्रिगेड बताती हैं कि इससे पहले वो कभी घर से बाहर नहीं निकली थी. वो चुल्हा-चौका संभालती थी और बच्चों की देखभाल करती थी. वो अपने इस रूटीन से खुश भी थी. ये इस आंदोलन की वजह से ही मुमकिन हो पाया है कि वो घर से बाहर निकल पाई और मोर्चा भी संभाला.वो आगे बताती हैं कि आज जीत कर वापस जाने की बहुत खुशी हो रही है. इस आदोंलन ने मेरे अंदर एक आत्मविश्वास पैदा कर दिया है. वो कहती हैं कि अब वो घर वापस जा कर चूल्हा- चौका नहीं संभालेगी, आगे आंदोलन की तैयारियां करेंगी. वो जोश भरे अंदाज़ से कहती हैं कि अब तो हम संसद जाएंगे.

ये लड़ाई असल में महिलाओं की ही थी

सिंघु बॉर्डर पर मौजूद एक महिला सुमन हुडा बेहद आत्मविश्वास से कहती हैं कि महिला की जिम्मेदारी होती है कि वह अपना घर संभाले, बजट संभाले और इसी लिहाज से यह आंदोलन की असली लड़ाई महिलाओं की थी. हम घर पहुंचकर खुशी जरूर मनाएंगे लेकिन अपने शहीद किसान भाइयों को श्रद्धांजलि भी देंगे. ये जीत महिलाओं के लिए एक नई पहल जैसी है. महिलाओं ने एकता सीखी है . वो कहती हैं कि इस आंदोलन ने हमें भाइचारे की ताकत सिखा दी है. 

अब छोटी सोच को पीछे छोड़ने का वक़्त
आंदोलन में मौजूद नीतू शोकन नाम की कार्यकर्ता बताती हैं कि पहले महिलाओं को बाहर नहीं निकलने दिया जाता था लेकिन इस आंदोलन  ने ना सिर्फ  महिलाओं को  घर से बाहर निकलने दिया बल्कि उन्हें लड़ाई में भी आगे  आने का मौका दिया. इसके लिए इन महिलाओं ने लाठियां भी खाई.  अच्छी बात है इस बार घर के पुरुषों नहीं महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया अब वक्त आ गया है की महिलाओं को लेकर छोटी-छोटी सोच से आगे बढ़ा जाए और एक नई शुरुआत की जाए. 

'ये हमारी दूसरी आज़ादी है'

आन्दोलन में मौजूद एक महिला कहती है कि ये हमारी दूसरी आज़ादी है. पहले हम घर मे चूल्हा चौका और बर्तन तक महदूद थे.  इस आंदोलन ने हमें  बहुत कुछ सिखा दिया ,अब इन सब चीजों का आगे इस्तेमाल करेंगे.अब महिला शक्ति रुकने वाली नहीं.


 

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