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180 रुपये में खरीदी जमीन, 47 साल तक चला मुकदमा, 16 लाख रुपए हुए खर्च

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक किसान को 180 रुपए में खरीदी गई जमीन के लिए 47 साल तक कानून लड़ाई लड़नी पड़ी. हालांकि अंत में जीत किसान की हुई है. इस पूरी कानूनी लड़ाई में कुल 16 लाख रुपए खर्च हुए हैं.

Land Battle (Photo: Representational image)
आशीष श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:37 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा. ये मामला सिर्फ 180 रुपए से जुड़ा है. जबकि इसकी कानूनी लड़ाई 4 दशक से ज्यादा तक चली. भले ही वक्त लगा, लेकिन जीत सच की ही हुई. इस मामले में महज 180 रुपये में खरीदी गई जमीन के लिए एक किसान परिवार को 47 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.

180 रुपए में खरीदी थी पौने दो बिस्वा जमीन-
गोसाईंगंज के बस्तिया गांव निवासी ब्रजेश वर्मा के मुताबिक उनके पिता स्वर्गीय रामसागर ने साल 1965 में करीब पौने दो बिस्वा जमीन खरीदी थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद इस जमीन पर धोखाधड़ी कर फर्जी रजिस्ट्री करा ली गई.

बताया गया कि साल 1973 में सह-खरीदार शिवरानी ने कथित रूप से फर्जीवाड़ा करते हुए रामसागर की जगह किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली. इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब एक गवाह ने विवाद के बाद सच्चाई उजागर की. इसके बाद रामसागर ने 1978 में गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर न्याय की लड़ाई शुरू की.

आखिरकार सच की हुई जीत-
मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा. इस दौरान 2003 में रामसागर का निधन हो गया, जबकि 2013 में शिवरानी की भी मौत हो गई. बावजूद इसके, दोनों पक्षों के वारिसों के बीच मुकदमा जारी रहा. आखिरकार दिसंबर 2025 में अदालत ने ब्रजेश वर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर दिया.

कानूनी लड़ाई में खर्च करने पड़े 16 लाख रुपए-
हालांकि, कोर्ट का फैसला आने के बाद भी जमीन पर कब्जा मिलने में तीन महीने का समय लग गया. इस लंबी कानूनी लड़ाई में वादी पक्ष को करीब 16 लाख रुपये खर्च करने पड़े. यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और जमीन विवादों की जटिलता को उजागर करता है.

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