मिडिल ईस्ट में शुरू हुए युद्ध के असर अब देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने लगे हैं. गुजरात के सूरत और आसपास के इलाकों में रहने वाले श्रमिकों का पलायन लगातार बढ़ रहा है. रोज कमाने और खाने वाले इन श्रमिकों के सामने अब दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ जहां उनके रोजगार छिन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गैस जैसी बुनियादी जरूरतें भी महंगी और दुर्लभ होती जा रही हैं.
पलायन कर रहे श्रमिकों का कहना है कि उनके पास खुद का गैस कनेक्शन नहीं है. सामान्य दिनों में उन्हें गैस सिलेंडर ब्लैक में मिल जाया करता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. गैस या तो मिल नहीं रही है और अगर मिलती भी है तो काफी ऊंची कीमत पर. ऐसे में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों के लिए महंगी गैस खरीदना मुश्किल हो गया है. परिवार का पेट भरना ही चुनौती बन चुका है.
रोजगार छिनने से बढ़ा संकट
श्रमिकों ने बताया कि काम की कमी के चलते उनकी नौकरियां भी छिन गई हैं. फैक्ट्रियों और छोटे उद्योगों में काम घटने से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं. मजबूरी में वे अपने गांव लौटने का फैसला कर रहे हैं. लेकिन घर वापसी भी आसान नहीं है. उन्हें कई-कई घंटों तक लंबी लाइनों में खड़ा रहकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है.
रेलवे ने बढ़ाई सुविधाएं
यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने कई विशेष कदम उठाए हैं. मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के अनुसार, समर सीजन में यात्रियों की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए कई हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. शनिवार रात और रविवार के दौरान कुल 12 ट्रेनें संचालित की जा रही हैं, जिनमें 9 स्पेशल और 3 नियमित ट्रेनें शामिल हैं.
इन ट्रेनों में जयनगर, मधुबनी, ब्रह्मपुर, समस्तीपुर, हसनपुर और थावे जैसे गंतव्यों के लिए सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं. इसके अलावा अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए 3 ट्रेनें हमेशा तैयार रखी गई हैं.
स्टेशन पर किए गए विशेष इंतजाम
यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए स्टेशन पर होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं. इन क्षेत्रों में एक समय में करीब 4000 लोग रुक सकते हैं. यहां बैठने, पानी, बिजली और पंखों की व्यवस्था की गई है. ट्रेन आने पर आरपीएफ, जीआरपी और अन्य स्टाफ यात्रियों को व्यवस्थित तरीके से प्लेटफार्म तक पहुंचाते हैं.
रिपोर्टर: संजय सिंह राठौड़
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