महंगाई के दौर में जहां एक वक्त की रोटी जुटाना भी कई लोगों को कई बार मुश्किल लगने लगता है, वहीं हैदराबाद का एक शख्स पिछले एक दशक से हर सुबह सैकड़ों जरूरतमंदों का पेट भर रहा है. कॉर्पोरेट नौकरी करने वाले इस शख्स को लोग 'फूडमैन' के नाम से जानते हैं. फूडमैन अपने ऑफिस जाने से पहले रोज सुबह 400 से ज्यादा लोगों के लिए ताजा खाना तैयार करवाकर अस्पतालों के बाहर मौजूद जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाते हैं.
सुबह 5 बजे से शुरू हो जाती है सेवा
जहां लोग आपनी ही तामझाम में व्यस्त रहते हैं, वहीं फूडमैन और उनकी टीम का दिन सुबह 5 बजे से शुरू हो जाता है. सबसे पहले वह और उनकी टीम ताजा खाना बनाती है, फिर उसे पैक किया जाता है और इसके बाद अस्पतालों के बाहर इंतजार कर रहे लोगों में बांटा जाता है. वह खुद भी लोगों को अपने हाथों से भोजन परोसते हैं, ताकि मुश्किल समय से गुजर रहे परिवारों को कम से कम एक वक्त का अच्छा खाना मिल सके. वह यह काम काफी वक्त से करते आ रहे हैं.
पिछले 10 सालों से सहारा बन रहे फूड मैन
कैंसर जैसी जटिल बीमारी आर्थिक तौर पर अच्छे-अच्छों की कमर तोड़ देती है. वहीं खाने जैसी सेवा देकर वह उन परिवारों के लिए हीरों से कम नहीं हैं. पिछले 10 साल से ज्यादा समय से यह सेवा मुफ्त में लगातार जारी है. उनकी टीम हैदराबाद के NIMS अस्पताल, निलोफर हॉस्पिटल और कैंसर हॉस्पिटल के बाहर रोजाना ताजा खाना बाटा करती है. यहां ऐसे कई लोग होते हैं, जो अपने बीमार परिजनों की देखभाल के लिए अस्पतालों के बाहर घंटों या कई दिनों तक रुके रहते हैं.
ऐसे शुरू हुई ये नेकी
दरअसल इस नेक पहल की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी. फूडमैन ने अपनी पहली सैलरी से इस अभियान की शुरुआत की थी. उस समय उनकी मां घर पर खाना बनाती थीं और दोनों मिलकर जरूरतमंदों को भोजन खिलाते थे. धीरे-धीरे यह छोटा सा प्रयास एक बड़े मिशन में बदल गया, जो आज भी बिना रुके जारी है. उनका सपना है कि हैदराबाद में कोई भी भूखा न रहे, वह अपने शहर को हंगर फ्री बनाना चाहते हैं.
फूडमैन का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को अपने बीमार परिजन की देखभाल करते समय भूखा नहीं रहना चाहिए. इसी सोच के साथ वह और उनकी टीम हर दिन 400 से अधिक लोगों तक मुफ्त भोजन पहुंचा रहे हैं. यह अभियान पूरी तरह नियमित रूप से चल रहा है और अब कई लोग इसमें सहयोग भी कर रहे हैं.
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