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उम्मीद टूट चुकी थी, तभी आया फोन, डेढ़ महीने बाद बेटे से मिली बुजुर्ग मां, गले लगकर फूट-फूटकर रोया बेटा

जानकारी के अनुसार, वृद्धा आनंदी देवी इलाज के लिए ग्वालियर ले जाई गई थीं, लेकिन भीड़भाड़ के बीच अचानक परिवार से बिछड़ गईं. इसके बाद बेटा प्रताप जाटव और परिवार के अन्य सदस्य लगातार उनकी तलाश में जुटे रहे. अस्पतालों, थानों और रिश्तेदारों तक हर जगह खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.

Elderly Woman Reunites With Family
gnttv.com
  • कोटा,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

सेवा, संवेदना और मानवता की मिसाल पेश करते हुए अपना घर आश्रम ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाने का पुण्य कार्य किया. ग्वालियर से इलाज के दौरान लापता हुई 75 वर्षीय वृद्धा आनंदी देवी अपने परिवार से डेढ़ महीने बाद कोटा में मिलीं. जैसे ही बेटा प्रताप जाटव अपनी माँ के सामने पहुंचा, वह खुद को रोक नहीं सका और माँ से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ा. यह भावुक पल वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर गया.

इलाज के दौरान परिवार से बिछड़ गई थीं वृद्धा
जानकारी के अनुसार, वृद्धा आनंदी देवी इलाज के लिए ग्वालियर ले जाई गई थीं, लेकिन भीड़भाड़ के बीच अचानक परिवार से बिछड़ गईं. इसके बाद बेटा प्रताप जाटव और परिवार के अन्य सदस्य लगातार उनकी तलाश में जुटे रहे. अस्पतालों, थानों और रिश्तेदारों तक हर जगह खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.

जेके लोन अस्पताल के बाहर लावारिस हालत में मिलीं
इसी बीच बीते माह समाजसेवी प्रतीक्षा पारीक ने कोटा के जे.के. लोन अस्पताल के बाहर एक वृद्ध महिला को लावारिस हालत में भटकते देखा. सूचना मिलने पर अपना घर आश्रम की टीम मौके पर पहुंची और वृद्धा को आश्रम में सुरक्षित आश्रय दिया. पूछताछ में वृद्धा ने अपना नाम आनंदी देवी बताया, लेकिन मानसिक अस्वस्थता के चलते वह अपना पता स्पष्ट नहीं बता पा रही थीं.

एक सुराग ने परिवार तक पहुंचा दिया
आश्रम में नियमित देखभाल, इलाज और काउंसलिंग के दौरान धीरे-धीरे एक अहम सुराग मिला. वृद्धा ने बताया कि वह ग्वालियर जिले के बरैनी गांव की रहने वाली हैं, जो डबरा थाना क्षेत्र में आता है. इसके बाद आश्रम टीम ने तत्काल डबरा थाने से संपर्क किया. पुलिस के माध्यम से बेटे प्रताप जाटव तक सूचना पहुंची. फोटो देखते ही प्रताप ने तुरंत अपनी माँ को पहचान लिया.

मां को देखते ही बेटे की आंखों से छलक पड़े आंसू
मां के मिलने की खबर सुनते ही प्रताप अपने भतीजे रामदास के साथ बिना देर किए कोटा के लिए रवाना हो गया. आश्रम पहुंचते ही जैसे ही उसने माँ को देखा, वह दौड़कर उनके गले लग गया. लंबे इंतजार और दर्द के बाद हुए इस मिलन ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया.

'ऐसा लगा जैसे भगवान ने मां को वापस लौटा दिया'
प्रताप जाटव ने बताया, “माँ को वृद्धावस्था की बीमारी के चलते इलाज के लिए ग्वालियर राजकीय चिकित्सालय ले गए थे. वहां अचानक भीड़ में मां हमसे बिछड़ गईं. डेढ़ महीने से पूरा परिवार परेशान था. थानों, अस्पतालों और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला. उम्मीद लगभग टूट चुकी थी, तभी अपना घर आश्रम का फोन आया. ऐसा लगा जैसे भगवान ने माँ को वापस लौटा दिया.”

समय रहते मिली देखभाल से बची गंभीर स्थिति
आश्रम टीम के अनुसार जब आनंदी देवी मिली थीं, तब उनकी हालत बेहद कमजोर थी. समय रहते इलाज और देखभाल नहीं मिलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. आश्रम की तत्परता, समाजसेवी सहयोग और पुलिस समन्वय से आखिरकार एक परिवार फिर से जुड़ सका.

-रिपोर्ट: चेतन गुर्जर

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