उत्तर प्रदेश की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट का नाम आते ही सियासी विरासत, जातीय समीकरण और पुराने चुनावी संघर्षों की चर्चा होने लगती है. गाजीपुर की इस सीट पर लंबे समय तक अंसारी परिवार का प्रभाव रहा है. 2022 में सपा ने यहां जीत दर्ज की थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटी हैं. वहीं, अतुल राय की संभावित सक्रियता भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है.
अंसारी परिवार का लंबे समय से रहा है प्रभाव
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट दिवंगत मुख्तार अंसारी की पैतृक सीट रही है. उनके बड़े भाई अफजाल अंसारी 1985 से 1996 के बीच पांच बार विधायक चुने गए. फिलहाल वह समाजवादी पार्टी से गाजीपुर के सांसद हैं. इस सीट का इतिहास राजनीतिक संघर्षों से भी जुड़ा रहा है. साल 2002 में बीजेपी के कृष्णानंद राय ने अफजाल अंसारी को हराकर जीत दर्ज की थी. 29 नवंबर 2005 को कृष्णानंद राय की छह अन्य लोगों के साथ गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी अलका राय विधायक बनीं. हालांकि, 2007 और 2012 में उन्हें शिबगतुल्ला अंसारी से हार मिली. 2017 में अलका राय ने जीत दर्ज की, जबकि 2022 में शिबगतुल्ला अंसारी के बेटे सुहैब अंसारी उर्फ मन्नू ने उन्हें करीब 19 हजार वोटों से हराया.
जातीय समीकरण पर रहेगी सबकी नजर
एसआईआर के बाद इस सीट पर करीब 3.83 लाख मतदाता बताए जा रहे हैं. इनमें लगभग 55 फीसदी पुरुष और 45 फीसदी महिला मतदाता हैं. भूमिहार समुदाय की हिस्सेदारी करीब 25 से 30 फीसदी बताई जाती है. दलित मतदाता 15 से 17 फीसदी और मुस्लिम मतदाता 10 से 12 फीसदी हैं. यादव समुदाय की हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी है. वहीं, ब्राह्मण, राजपूत और बनिया समुदायों के साथ राजभर, बिंद, मल्लाह और निषाद जैसी जातियां भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती हैं. पिछले चुनाव में ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सपा के साथ थी. इस बार वह बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन में है. ऐसे में बदले गठबंधन का असर भी चुनावी चर्चा का हिस्सा है.
सपा और बीजेपी ने शुरू की अपनी-अपनी दावेदारी
सपा विधायक सुहैब अंसारी का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने विधायक निधि से सड़क और बिजली जैसे मुद्दों पर काम कराया. उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार में उनकी बात नहीं सुनी गई. उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच सक्रिय रहने के कारण 2027 में भी सपा जीत दर्ज करेगी. वहीं, बीजेपी जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय का कहना है कि 2022 में जातीय समीकरणों के कारण पार्टी को हार मिली थी. उन्होंने दावा किया कि मोदी और योगी सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बीजेपी इस बार जीत के लिए प्रयास करेगी.
अतुल राय की भूमिका पर भी नजर
स्थानीय पत्रकार शिवकुमार और अभिषेक सिंह के मुताबिक, फिलहाल मुकाबले की चर्चा सपा के सुहैब अंसारी और बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों के बीच है. बीजेपी की ओर से अलका राय के बेटे पीयूष राय, आनंद राय उर्फ मुन्ना और अन्य स्थानीय नेताओं के नाम चर्चा में हैं. पत्रकारों का मानना है कि पूर्व घोसी सांसद अतुल राय अगर बसपा से खुद या परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारते हैं, तो मुकाबले में एक नया समीकरण बन सकता है. हालांकि, अभी उम्मीदवारों को लेकर कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है. मुख्तार अंसारी के निधन के बाद बदलते राजनीतिक माहौल में मोहम्मदाबाद सीट पर 2027 का चुनाव कई मुद्दों और समीकरणों के बीच लड़ा जा सकता है.
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