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Muzaffarnagar: 28 साल बाद SIR ने मिलाया! परिवार से मिलकर भावुक हुए बुजुर्ग

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बुजुर्ग 28 साल बाद घर गांव लौटे. वो परिवार वालों से मिलकर भावुक हो गए. उनका पैतृक घर से संपर्क टूट गया था. जब SIR में दस्तावेजों की जरूरत पड़ी तो उनको घर की याद आई.

Muzaffarnagar News
gnttv.com
  • मुजफ्फरनगर,
  • 01 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद स्थित खतौली कस्बे के एक परिवार में भावुक भरा पर उस समय देखने को मिला, जब मृतक मान लिए गए एक बुजुर्ग चाचा शरीफ 28 साल बाद अपने घर लौटे, आपको बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों के लिए चाचा शरीफ को अपने घर लौटना पड़ा. जिसके बाद घर वालों की खुशियों का ठिकाना ना रहा.

SIR के चलते 28 साल बाद लौटा बुजुर्ग-
दरसअल खतौली कस्बा स्थित मोहल्ला बालक राम निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति शरीफ की पहली पत्नी का इंतकाल सन 1997 में हो गया था. जिसके चलते दूसरी शादी करने के बाद अपनी पत्नी के साथ शरीफ पश्चिम बंगाल चले गए थे. कुछ समय तक तो उस समय परिवार से संपर्क रहा. लेकिन धीरे-धीरे वह संपर्क टूट गया. जिसके बाद परिवार के लोगों ने शरीफ के बताए गए पश्चिम बंगाल के पते पर जाकर भी उन्हें ढूंढने की कोशिश की, लेकिन जब कुछ पता ना चला, तो परिवार वालों ने शरीफ को मृत मान कर संतोष कर लिया. लेकिन शुरू हुई एसआईआर में जब बुजुर्ग शरीफ को दस्तावेजों की जरूरत हुई तो वह अचानक से 2 दिन पूर्व 28 साल बाद अपने घर वापस लौटा, जिसके बाद उसके परिवार वालों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा.

28 सालों से पश्चिम बंगाल में रहते हैं बुजुर्ग-
बरहाल इस दौरान बुजुर्ग शरीफ को यह भी पता चला कि इन 28 सालों में उसके परिवार के बहुत से लोगों का इंतकाल भी हो चला है. जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग शरीफ जरूरी कागजात लेने के बाद सभी अपने परिवार वालों से मिलकर एक बार फिर से पश्चिम बंगाल लौट गए हैं. इस दौरान बुजुर्ग शरीफ ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वेदानपुर में पिछले 28 सालों से रह रहा है.

सालों से तलाश कर रहे थे घरवाले-

बुजुर्ग शरीफ के भतीजे मोहम्मद अकलिम कहना है कि मोहम्मद अकलीम वालिद मोहम्मद इदरीश यह मेरे चाचा हैं. साल 1997 से हमारी चाची का इंतकाल हो गया था. तो फिर उन्होंने दूसरा निकाह किया था बंगाल में, उस वक्त लैंड लाइन फोन थे, मोबाइल नहीं थे. सन 97 में दो नंबर अपने और एक नंबर चाचा का, तीन नंबर मैंने उनको दिए थे. लेकिन उसके बाद से इनका कोई अता-पता नहीं चला. इन्होंने हमें बताया था. खड़कपुर के अंदर एक मोती टेलर है, मालूम कर लेना. वहां रहता हूं. मैं खड़कपुर भी गया. मोती ट्रेलर के बारे में मालूम किया तो पता चला कि वह मोती टेलर उधर नहीं है. फिर मैं तकरीबन सन 2011 आसनसोल गया. तो हमने वहां जमात के बहुत से लोगों से भी मालूम किया कि इस नाम के यूपी के कोई रहने वाला कोई है. लेकिन पता चला कि यहां कोई नहीं रहता. करीबन 15, 20 साल तलाश किया. लेकिन नहीं मिले. अब वे लौट आए हैं.

(संदीप सैनी की रिपोर्ट)

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