दिल्ली का फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर ठगी करने वाला प्रेमी जोड़ा गिरफ्तार, 20 लोगों को बनाया शिकार, 5 लाख की ठगी का खुलासा

मुजफ्फरनगर में एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है. जिसमें एक प्रेमी जोड़ा खुद को फिल्मी स्टाइल में फर्जी सीबीआई और कस्टम अधिकारी बनकर लोगों को ब्लैकमेल करता था. यह जोड़ा सोशल मीडिया के जरिए पहले लोगों से दोस्ती करता. फिर उनकी निजी जानकारी जुटाकर डराकर लाखों की ठगी करता था. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

फर्जी पहचान बनाकर ठगी
gnttv.com
  • मुजफ्फरनगर ,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST

मुजफ्फरनगर में एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है. जिसमें एक प्रेमी जोड़ा खुद को फिल्मी स्टाइल में फर्जी सीबीआई और कस्टम अधिकारी बनकर लोगों को ब्लैकमेल करता था. यह जोड़ा सोशल मीडिया के जरिए पहले लोगों से दोस्ती करता. फिर उनकी निजी जानकारी जुटाकर डराकर लाखों की ठगी करता था. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

फर्जी पहचान बनाकर ठगी 
दरअसल, 4 अप्रैल को शाहपुर थाना क्षेत्र की इकरा नाम की महिला ने पुलिस में शिकायत दी थी. उसने बताया कि व्हाट्सऐप पर हिदायतुल्लाह नाम के व्यक्ति से उसकी बातचीत शुरू हुई थी. यह व्यक्ति असल में दिल्ली का रहने वाला मंसूर अहमद था. उसने खुद को उसकी बहन के माध्यम से जोड़कर भरोसा हासिल किया. इसके बाद उसने अपनी गर्लफ्रेंड रोजी के साथ मिलकर ठगी की योजना बनाई.

इसके बाद दोनों ने फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया. कभी खुद को सीबीआई अधिकारी बताया. कभी कस्टम अधिकारी बनकर फोन किया. इकरा और उसके परिवार को जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया. धीरे-धीरे उन्हें मानसिक दबाव में लेकर 5 लाख रुपये ठग लिए गए. आरोपी लोगों की आर्थिक स्थिति और निजी जानकारी जुटाकर उन्हें फंसाते थे.

15000 रुपए का इनाम
शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की. एसपीआरए सीओ बुढ़ाना थाना अध्यक्ष शाहपुर सर्विलांस और एसओजी की टीम बनाई गई. जांच के बाद दिल्ली से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपियों के नाम रोजी और मंसूर अहमद हैं. मंसूर मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला है लेकिन दिल्ली में रहकर काम करता था.

पूछताछ में इन्होंने अपना जुर्म स्वीकार भी किया है. इनके पास से डेबिट कार्ड ,मोबाइल फोन, फर्जी आईडी कार्ड ,सर्च वारंट ,सर्च वारंट जो सीबीआई ऑफिसर इस्तेमाल करते हैं. फर्जी सर्च वारंट भी इन्हें पासबुक चेक बुक और 2 लाख 760 रुपए बरामद किए गए हैं. इस प्रकार से 318 ,319 ,338 336 और 340 बीएनएस के तहत अग्रिम कार्रवाई करते हुए, जेल भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है. इसके साथ साथ पुलिस टीम को तुरंत कार्रवाई करने के लिए 15000 रुपए का इनाम भी दिया जा रहा है.

कैश और कार्ड जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन डेबिट कार्ड तीन मोबाइल फोन एक फर्जी आईडी एक फर्जी सर्च वारंट एक पासबुक और लगभग 2 लाख 760 रुपये नकद बरामद किए हैं. पूछताछ में दोनों ने अपना अपराध स्वीकार किया है. उन्होंने बताया कि वे लोगों को डरा धमकाकर एटीएम और ऑनलाइन माध्यम से पैसे निकालते थे. वहीं पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह जोड़ा अब तक लगभग 20 लोगों को निशाना बना चुका है. वे सोशल मीडिया पर पहले दोस्ती करते थे. फिर निजी जानकारी लेकर लोगों को ब्लैकमेल करते थे. महिला आरोपी पहले भावनात्मक जुड़ाव बनाती थी. उसके बाद आर्थिक जानकारी हासिल की जाती थी और फिर ठगी की जाती थी.

फिल्मों और सीरियल से सीखा तरीका
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने फिल्मों और सीरियल देखकर यह तरीका सीखा था. वे फर्जी अधिकारी बनकर लोगों पर दबाव डालते थे और उनसे पैसे वसूलते थे. इस तरीके से वे लंबे समय से ठगी कर रहे थे. एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर फ्रॉड के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. यह मामला डिजिटल अरेस्ट और फर्जी अधिकारी बनकर ठगी का है. पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है.

रिपोर्टर: संदीप सैनी

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