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National Flag Hoisting Rules 15 August 2026: स्वतंत्रता दिवस पर आप भी फहराना चाहते हैं तिरंगा... तो जान लें राष्ट्रीय ध्वज को ध्वजारोहण करने से जुड़े ये जरूरी नियम

Indian Flag Hoisting Rules: 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था. इस दिन लाल किला पर जहां प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं, वहीं स्कूल-कॉलेजों, कार्यालयों व अन्य जगहों पर भी तिरंगा को फहराया जाता है. यदि आप भी राष्ट्रीय ध्वज को ध्वजारोहण करने जा रहे हैं तो इसके नियम जरूर जान लें. गलत तरीके से तिरंगा फहराना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होता है, जो कि कानूनन जुर्म है. इस मामले में जुर्माना या जेल तक हो सकती है. यहां हम आपको तिरंगा फहराने के नियम बता रहे हैं.

National Flag Hoisting Rules
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:33 AM IST

Bharat ka Jhanda Fahrane ke Niyam: पूरे देश में धूमधाम से आजादी का जश्न मनाया जा रहा है. आज ही के दिन 15 अगस्त 1947 को हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था. 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर जहां लाल किला पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं, तो वहीं स्कूल-कॉलेजों, कार्यालयों व अन्य जगहों पर भी तिरंगा को फहराया जाता है. यदि आप भी राष्ट्रीय ध्वज को ध्वजारोहण करने जा रहे हैं तो इसके नियम जरूर जान लें.

गलत तरीके से तिरंगा फहराना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होता है, जो कि कानूनन जुर्म है. इस मामले में जुर्माना या जेल तक हो सकती है. यहां हम आपको तिरंगा फहराने के नियम बता रहे हैं. आपको मालूम हो कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज सिर्फ तीन रंगों का कपड़ा नहीं, बल्कि यह आजादी, एकता और गर्व का प्रतीक है. यह हर भारतीय की भावनाओं से जुड़ा हुआ है. तिरंगे का सम्मान और सही तरीके से प्रदर्शन करना न केवल हमारा कर्तव्य है, बल्कि इसके लिए भारत सरकार ने स्पष्ट नियम और ध्वज संहिता भी बनाई है. देश की शान तिरंगा से जुड़े नियमों का पालन हर भारतीय का कर्तव्य है, चाहे वह 15 अगस्त हो, 26 जनवरी हो या कोई भी सामान्य दिन.

कैसा है हमारा राष्ट्रीय ध्वज
हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों का है. इसे तिरंगा कहते हैं. राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत और सबसे नीचे हरा रंग होता है. श्वेत रंग पर नीले रंग का अशोक चक्र का चिह्न होता है. अशोक चक्र में 24 तीलियां होती हैं. राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के निर्माता पिंगली वेंकैया थे.

फ्लैग कोड 2002 के अंतर्गत आते हैं तिरंगा से जुड़े सभी नियम 
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को फहराने से जुड़े सभी नियम और कानून फ्लैग कोड 2002 के अंतर्गत आते हैं. फ्लैग कोड 26 जनवरी 2002 से लागू हैं. इससे पहले तक तिरंगा फहराने के नियम एम्बलेम्स एंड नेम्स (प्रिवेन्शन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट 1950 और प्रिवेन्शन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 के तहत आते थे.

मोदी सरकार ने साल 2022 में फ्लैग कोड के नियमों में दो बदलाव किए थे. पहला बदलाव यह था कि तिरंगा को सिर्फ सुबह से सूर्यास्त तक ही नहीं फहराया जा सकता बल्कि इसे रात में भी फहराया जा सकता है यानी तिरंगा को 24 घंटे फहराया जा सकता है. मोदी सरकार ने ये बदलाव इसलिए किया था ताकि लोगों को अपने घरों पर भी तिरंगा को फहराने के लेकर प्रोत्साहित किया जा सके. मोदी सरकार ने दूसरा बदलाव यह किया था कि सिर्फ हाथ से बुने और काते ऊन, कपास या रेशमी खादी के तिरंगे फहराने की जगह मशीन से बने कपास, ऊन या रेशमी खादी के तिरंगे को भी फहराए जा सकता है. लोग पॉलिएस्टर के तिरंगे झंडे को भी फहरा सकते हैं.

तिरंगे का अपमान होने पर सजा
भारतीय कानून के अनुसार तिरंगे का अपमान करना एक गंभीर अपराध है. यदि कोई व्यक्ति तिरंगे का अपमान करता हुआ पाया जाता है तो उसे 3 साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों सजाएं दी जा सकती हैं. इसके लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 में प्रावधान किया गया है. इस कानून के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक स्थान पर तिरंगे और संविधान को जलाना, कुचलना, फाड़ना या किसी तरह का नुकसान पहुंचाना भी अपराध होगा.

तिरंगा फहराने के नियम

  • तिरंगा फहराते समय यह याद रखें कि यह आयताकार होना चाहिए. इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए. 
  • अशोक चक्र में 24 तीलियां होनी चाहिए और यह सफेद पट्टी के बीच में होना चाहिए.
  • तिरंगा फहराते समय यह ध्यान रखें कि यह भीगा न हो. नहीं किसी प्रकार की उसे क्षति हुई है. 
  • तिरंगा में केसरियां रंग हमेशा ऊपर, सफेद रंग बीच में और हरा रंग सबसे नीचे की पट्टी में होनी चाहिए. 
  • झंड़ा कटा-फटा नहीं होना चाहिए. तभी आप इसे फहरा सकते हैं.
  • किसी भी स्थिति में तिरंगा जमीन को नहीं छूना चाहिए. राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा कोई और ध्वज नहीं लगाया जा सकता है.
  • पहले झंडा सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जाता था, लेकिन अब आप इसे रात में भी फहरा सकते हैं.
  • पहले केवल हाथ से बने कपास, पालिएस्टर, ऊन, खादी इत्यादि से बने झंडे को बनाने की अनुमति थे लेकिन अब मशीन से भी बने झंडे को फहराने की अनुमति मिल चुकी है.
  • झंडे के किसी भी भाग को जलाने, नुकसान पहुंचाने, मौखिक या शाब्दिक तौर पर इसका अपमान करने पर तीन साल की जेल के साथ जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं.
  • झंडे पर कुछ लिखा नहीं जा सकता है. तिरंगे को अपने पास पूरे सम्मान के साथ तह लगाकर रखना है. फेंकना और क्षति पहुंचाने की मनाही है.
  • एक मोटर कार पर झंडा अकेला प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे एक डंडे (स्टाफ) से फहराया जाना चाहिए, जिसे या तो बोनट के सामने बीचो-बीच पर या कार के सामने दाहिनी ओर मजबूती से लगा हुआ होना चाहिए.
  • बिना सरकारी आदेश के झंडे को आधा झुकाकर नहीं फहराना चाहिए.

 

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