लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ऑनलाइन गेमिंग की लत ने एक नाबालिग को इस कदर शातिर बना दिया कि उसने अपने ही परिवार के होश उड़ा दिए. दरअसल 17 साल के एक छात्र ने कर्ज उतारने और ऐश करने के लिए न सिर्फ खुद के अपहरण की झूठी कहानी रची, बल्कि घरवालों को अपनी मौत की भी खबर दे डाली. हालांकि, जब लखनऊ पुलिस ने मामले की परतें खोलनी शुरू कीं, तो जो सच सामने आया उसने सबको हैरान कर दिया.
NEET की तैयारी कर रहा था नाबालिग
पूरी कहानी की शुरुआत 20 अक्टूबर की रात 9 बजे के बाद हुई. पारा इलाके में रहकर NEET की तैयारी कर रहा 17 वर्षीय किशोर अचानक लापता हो गया. घबराई मां ने तुरंत पारा थाने पहुंचकर बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. छात्र के पिता दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं. परिवार को लगा कि उनका बेटा किसी बड़ी मुसीबत में फंस गया है, लेकिन असल में यह पूरा ड्रामा खुद उस नाबालिग का ही लिखा हुआ था.
दी खुद की फर्जी किडनैपिंग और मौत की खबर
घर से गायब होने के बाद छात्र ने बेहद शातिराना अंदाज में अपनी साजिश को अंजाम दिया. उसने सबसे पहले अपने मोबाइल से सिम कार्ड निकाल दिया ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके. इसके बाद उसने वाई-फाई की मदद से व्हाट्सएप के जरिए अपनी मां, पिता और चाचा को खुद के किडनैप होने का मैसेज भेजा.
कुछ घंटों बाद उसने अपनी आवाज बदलकर एक वॉइस नोट भेजा और 5 लाख रुपये की फिरौती मांगी. बेटे की जान बचाने के लिए पिता ने किसी तरह हाथ-पांव मारकर 3 लाख रुपये का इंतजाम भी कर लिया. लेकिन हद तो तब हो गई जब इस शातिर किशोर ने घरवालों को खुद की ही मौत की झूठी खबर भेज दी, जिसे सुनकर पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई.
किडनैप हुआ नाबालिग मिला महिला मित्र के साथ
किशोर की मौत और अपहरण के मैसेज से पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया. पुलिस ने तुरंत सर्विलांस और मुखबिरों का जाल बिछाया और गहनता से जांच शुरू की. पुलिस की तफ्तीश में सारा सच बाहर आ गया. जिस बेटे को घरवाले मरा या अगवा समझ रहे थे, उसे पुलिस ने उसकी महिला मित्र (गर्लफ्रेंड) के साथ सकुशल बरामद कर लिया. पुलिस ने तुरंत परिजनों को फोन कर बेटे के जिंदा होने की खबर दी, तब जाकर परिवार की जान में जान आई.
गेमिंग और महिला मित्र पर खर्चता था पैसे - पुलिस
पूरे मामले का खुलासा करते हुए डीसीपी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नाबालिग को ऑनलाइन गेमिंग की बुरी लत लग चुकी थी. वह पहले भी गेमिंग के चक्कर में करीब 70 हजार रुपये हार चुका था, जिसकी भरपाई उस वक्त घरवालों ने कर दी थी. इसके बावजूद उसकी लत नहीं छूटी.
वह पढ़ाई और परीक्षा के नाम पर आए दिन घरवालों से 3 से 4 हजार रुपये मांगता रहता था. साथ ही उसने बाहर के लोगों से उधार लेकर गेम खेलना जारी रखा और फिर से करीब 50 हजार रुपये गंवा दिए. जब घरवालों ने उसकी रोज-रोज की डिमांड से तंग आकर पैसे देने बंद कर दिए, तो उधार चुकाने के लिए उसने अपने ही अपहरण की यह खौफनाक साजिश रच डाली. पुलिस के अनुसार इस किशोर की एक महिला मित्र भी जिसको घूमने और अन्य गतिविधियों के लिए वो पैसे खर्च देता था .