Traffic Challan: काट दिया गया वाहन का चालान? 45 दिन में नहीं किया चैलेंज.. तो भरना पड़ेगा जुर्माना, जानें क्या कहते हैं नए नियम?

अगर आपको लगता है कि आपका चालान गलत तरीके से कटा है, तो आप उसे चैलेंज भी कर सकते हैं. जानें कैसे करेंगे उसे चैलेंज.

सांकेतिक तस्वीर
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:30 AM IST

ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अब सिर्फ जुर्माना भरना ही ऑप्शन नहीं है. अगर आपको लगता है कि आपका चालान गलत तरीके से कटा है, तो आप उसे चैलेंज भी कर सकते हैं. सड़क परिवहन मंत्रालय ने अब चालान और ई-चालान को लेकर प्रक्रिया और तय समय-सीमा जारी कर दी है. 

मंत्रालय के अनुसार देशभर में केवल करीब 38 प्रतिशत ई-चालान ही लोग भुगतान करते हैं, बाकी लंबित रह जाते हैं. इसी को देखते हुए अब नियमों को ज्यादा व्यवस्थित और सख्त बनाया गया है.

कैसे करें चालान को चैलेंज?
चालान होने की स्थिति में आपके पास नए नियमों के मुताबिक चालान मिलने के बाद दो ऑप्शन होंगे. पहला चालान स्वीकार करके जुर्माना भर दें, या चालान को चुनौती दें. अगर आप चालान को गलत मानते हैं, तो आपको इसे 45 दिनों के भीतर चैलेंज करना होगा. यह प्रक्रिया echallan.parivahan.in के सेंट्रल पोर्टल पर पूरी की जाएगी.

चालान को चैलेंज करते समय आपको डॉक्यूमेंट्री सबूत अपलोड करना होगा. साथ ही डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी के सामने अपनी बात रखनी होगी. अगर आपने 45 दिनों के भीतर चालान को चैलेंज नहीं किया, तो डिफॉल्ट रूप से माना जाएगा कि आपने  चालान स्वीकार कर लिया है. जिसके बाद का विकल्प केवल जुर्माना भरना ही होगा.

कितने दिन बाद भरना पड़ेगा जुर्माना?
अगर आपने 45 दिनों के अंदर चालान को चैलेंज नहीं किया, तो आपको जुर्माना अगले 30 दिनों में भरना होगा. यानी कुल मिलाकर चालान जारी होने की तारीख से 75 दिन (45 + 30 दिन) के भीतर पेमेंट अनिवार्य होगा. पेमेंट आप ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी माध्यम से कर सकते हैं.

पहले क्या सिस्टम था और अब क्या बदला?
पहले नियम यह था कि अगर चालान 90 दिनों तक भुगतान नहीं होता, तो वह ऑटोमैटिकली वर्चुअल कोर्ट में चला जाता था. लेकिन समस्या यह थी कि केस कोर्ट में जाने के बाद मामला लंबित हो जाता था. ऐसे में ट्रांसपोर्ट विभाग कई जरूरी सेवाओं पर रोक नहीं लगा सकता था.

ये सेवाएं पहले नहीं रोकी जा सकती थीं?
वर्चुअल कोर्ट में मामला जाने के बाद कई बार ये सेवाएं प्रभावित नहीं हो पाती थीं. जैसे कि RC ट्रांसफर, RC रिन्यूअल, डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट. इसी वजह से अब सरकार ने तय समय-सीमा और प्रोसेस को ज्यादा साफ और प्रभावी बना दिया है.

 

Read more!

RECOMMENDED