Advertisement

Indian Railway: घर शिफ्ट करना हुआ आसान.. रेलवे मौजूदा घर से सामान पहुंचाएगा नए शहर, जानें कैसे तय होगी लागत

भारतीय रेलवे अब सामान लोगों के घर से पिक कर उन्हें गंतव्य पते तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खुद उठाएगा. इससे सामान रेलवे यार्ड तक पहुंचाने या फिर गंतव्य स्टेशन से घर लाने की झंझट से भी बच सकेंगे.

gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

भारतीय रेल ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मुंबई और कोलकाता के बीच डोर-टू-डोर फ्रेट और पार्सल सेवा की शुरुआत की है. अब ग्राहक अपना सामान सीधे गोदाम से अंतिम डिलीवरी पॉइंट तक रेलमार्ग के जरिए मंगवा या भेजवा सकेंगे. अगर वह घर भी शिफ्ट कर रहे हो तो सामान को इस सेवा से एक शहर से दूसरे शहर भेजा जा सकता है.

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे अब सिर्फ कोयला, इस्पात या सीमेंट जैसी भारी वस्तुओं के अलावा पूरी लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाला आधुनिक नेटवर्क बन रहा है. उन्होंने बताया कि रेलवे ने कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर तीन नई पहल शुरू की हैं. इसमें उत्तर प्रदेश में एकीकृत लॉजिस्टिक हब, दिल्ली-कोलकाता के बीच टाइम-बाउंड कंटेनर ट्रेन सेवा और मुंबई-कोलकाता के बीच डोर-टू-डोर पार्सल सर्विस है.

घर से घर तक पहुंचेगा आपका सामान

रेल मंत्रालय के अनुसार, नई सेवा के तहत रेलवे अब छोटे से छोटे पार्सल को भी घर से उठाकर गंतव्य तक पहुंचाएगा. इसमें घरेलू सामान, ल्यूब ऑयल, उपभोक्ता वस्तुएं, दवाएं, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और FMCG आइटम्स शामिल होंगे. रेल मंत्री ने बताया कि इस सेवा से ग्राहकों को 7.5% तक की लागत में बचत और 30% तेज़ डिलीवरी मिलेगी, जो अब तक की सड़क परिवहन व्यवस्था की तुलना में कहीं बेहतर होगी.

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डोर-टू-डोर सेवा देश की लॉजिस्टिक प्रणाली में क्रांति लाएगी. इससे परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी. रेल मंत्री ने यह भी बताया कि इस सेवा के साथ-साथ दिल्ली-कोलकाता रूट पर शुरू की गई पहली अश्योर्ड ट्रांजिट कंटेनर ट्रेन के बाद जल्द ही कई और ट्रेनें इस मार्ग पर जोड़ी जाएंगी.

कैसे तय होगी ट्रांस्जिट लागत

रेलवे अधिकारी का कहना है कि दूरी और वजन के हिसाब से रेट तय होंगे. हालांकि यह सड़क मार्ग से भेजने की लागत से काफी कम होंगे. बड़ा फायदा यह होगा कि कंटेनर से सामान भेजना सुरक्षित रहेगा और बारिश-धूप की वजह से खराब होने की आशंका भी कम होगी. पहले 100 घंटे लगते थे, तो अब 60 घंटे ही लगेंगे. रेलवे की इकाई ई-कॉनकोर लॉजिस्टिक साइट या एप पर लॉगइन कर बुकिंग कर सामान पार्सल करा सकेंगे.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement