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Patna High Court Ruling: मुंह दबाकर, महिला के ऊपर लेटना... अपने आप में दुष्कर्म का प्रयास नहीं, हाईकोर्ट ने रद्द आरोपी की सजा

पटना हाईकोर्ट ने बेगूसराय के एक मामले में कहा कि महिला का मुंह दबाकर बिस्तर पर जबरन लेटाना अपने आप में दुष्कर्म का प्रयास साबित नहीं होता. कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ आरोपी की सजा को रद्द कर दिया है.

Patna high court
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

किसी महिला के साथ गलत हरकत करना और दुष्कर्म की कोशिश करना, कानून की नजर में दो अलग-अलग अपराध हो सकते हैं. पटना हाईकोर्ट ने बेगूसराय के एक पुराने मामले में इसी अंतर को समझाते हुए आरोपी की दुष्कर्म के प्रयास की सजा रद्द कर दी. कोर्ट ने माना कि महिला के घर में घुसना, उसके ऊपर लेटना और चीखने से रोकने के लिए मुंह दबाना गंभीर हरकतें हैं, लेकिन इस मामले में दुष्कर्म की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले. हालांकि, कोर्ट ने महिला की लज्जा भंग करने और घर में जबरन घुसने के अपराध में आरोपी की सजा बरकरार रखी.

क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिहार के बेगूसराय जिले का है और घटना फरवरी 2010 की है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, रात करीब 10 बजे मोहम्मद ऐनुल हक एक विधवा महिला की झोपड़ी में घुस गया. आरोप था कि उसने पहले दीया बुझाया, फिर महिला के ऊपर लेट गया और उसके चिल्लाने पर मुंह दबा दिया, ताकि उसकी आवाज बाहर न जा सके. महिला ने जब शोर मचाया तो आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए. रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति समेत करीब 10 से 15 ग्रामीण वहां पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया. इस मामले में निचली अदालत ने 29 जुलाई 2013 को ऐनुल हक को दोषी ठहराते हुए दुष्कर्म की कोशिश के लिए चार साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी. इसके बाद आरोपी ने फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी.

कोर्ट ने सबूतों को लेकर क्या कहा?
जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने 8 अक्टूबर को आरोपी की अपील पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि महिला के घर में रात के समय घुसने, दीया बुझाने, उसके ऊपर लेटने और मुंह दबाने की बात सामने आई थी. लेकिन दुष्कर्म की कोशिश साबित करने के लिए यह देखना भी जरूरी था कि क्या आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया था.

कोर्ट के सामने ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं थे, जिनसे यह साबित हो कि महिला या आरोपी के कपड़े उतारे गए थे, कपड़े फटे थे या शारीरिक संबंध बनाने की दिशा में कोई स्पष्ट कदम उठाया गया था. मेडिकल या दूसरे सबूत भी आरोप की पुष्टि के लिए पेश नहीं किए गए थे. कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि घटना के मुख्य हिस्से के अलावा आरोपी ने आगे क्या किया, इस बारे में अभियोजन के सबूत न तो एक जैसे थे और न ही दूसरे सबूतों से उनकी पुष्टि हुई.

फैसले में पीड़िता की गवाही के बारे में कोर्ट ने कहा-
"पीड़िता के बयान से घटना के मुख्य पहलू पर पूरा भरोसा बनता है कि आरोपी रात में उसके घर में घुसा, उसने दिया, वह पीड़िता के ऊपर आकर लेट गया और उसकी चीख दबाने के लिए उसका मुंह दबाया. हालांकि, इससे आगे आरोपी ने क्या किया या क्या करने की कोशिश की, इस बात पर अभियोजन के सबूत न तो एक समान हैं और न ही किसी अन्य सामग्री से अपराध की पुष्टि होती है. शिकायत याचिका में बलात्कार (rape) के अपराध का आरोप लगाया गया था."

हाईकोर्ट ने क्या दिया अंतिम फैसला?
कोर्ट ने दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में ऐनुल हक की दोषसिद्धि रद्द कर दिया. हालांकि, महिला की लज्जा भंग करने और घर में जबरन घुसने के अपराध में उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी गई. इन दोनों अपराधों में उसकी सजा जेल में पहले से बिताई गई अवधि, यानी करीब ढाई महीने तक सीमित कर दी गई. कोर्ट ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह पूरी रकम पीड़ित महिला को मुआवजे के रूप में दी जाए. राशि आठ सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी. ऐसा नहीं करने पर आरोपी को छह महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी. 
 

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