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दिल्ली में प्रदूषण से लड़ेंगे Dust Catchers, क्या सांसों में घुलते जहर को रोक पाएंगी ये मशीनें?

डस्ट कैचर ऐसी मशीनें या उपकरण होते हैं, जिन्हें हवा में मौजूद धूल के कणों को पकड़ने और उनकी मात्रा कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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Dust Catchers Dust Catchers

दिल्ली में सर्दियां आते ही हवा दमघोटू हो जाती है. सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण स्थलों से निकलने वाले कण, वाहनों का धुआं और फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण हवा को जहरीला बना देते हैं. इससे बचने के लिए दिल्ली में धूल को पकड़ने वाली मशीनों यानी डस्ट कैचर का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये डिवाइस हवा में मौजूद धूल के कणों को पकड़कर उन्हें फैलने से रोकती है.

क्या हैं Dust Catchers और कैसे करती हैं काम?
डस्ट कैचर ऐसी मशीनें या उपकरण होते हैं, जिन्हें हवा में मौजूद धूल के कणों को पकड़ने और उनकी मात्रा कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें आमतौर पर उन जगहों पर लगाया जाता है, जहां धूल ज्यादा उड़ती है. हालांकि, अलग-अलग डस्ट कैचर की बनावट और काम करने का तरीका अलग हो सकता है. कुछ मशीनें हवा को अपनी ओर खींचती हैं और फिल्टर की मदद से धूल के कणों को रोकती हैं. वहीं, कुछ उपकरणों में पानी की बूंदों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे धूल के कण भारी होकर नीचे बैठ जाते हैं. इस तरह हवा में उड़ने वाली धूल को कम करने में मदद मिल सकती है.

दिल्ली में क्यों पड़ रही इन मशीनों की जरूरत?
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह धूल भी है. सड़क किनारे जमा मिट्टी, निर्माण कार्य, खुले में पड़ा मलबा और गाड़ियों की आवाजाही से धूल हवा में फैलती रहती है. हवा में मौजूद धूल के बहुत छोटे कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं. खासकर PM10 और PM2.5 जैसे प्रदूषक चिंता का कारण हैं. PM10 में 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण शामिल होते हैं, जबकि PM2.5 के कण इससे भी छोटे होते हैं. PM2.5 जैसे बारीक कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं. लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से सांस संबंधी परेशानियों और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

 

ऐसे में डस्ट कैचर का इस्तेमाल धूल को फैलने से पहले या हवा में मौजूद धूल को पकड़ने के लिए किया जा सकता है. लेकिन इनका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि मशीन किस तरह की है, कहां लगाई गई है और कितनी क्षमता से काम करती है.

क्या डस्ट कैचर से साफ हो जाएगी दिल्ली की हवा?
डस्ट कैचर प्रदूषण कम करने की कोशिशों में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें दिल्ली की जहरीली हवा का पूरा समाधान नहीं माना जा सकता. ये मशीनें मुख्य रूप से धूल जैसे कणों को कम करने में मदद करती हैं. वाहनों से निकलने वाली गैसों, उद्योगों के उत्सर्जन और दूसरे प्रदूषकों को रोकने के लिए अलग-अलग उपायों की जरूरत होती है. इसके अलावा, अगर मशीनें सीमित जगह पर लगाई जाती हैं, तो उनका असर भी उसी क्षेत्र तक ज्यादा हो सकता है. पूरे शहर की हवा साफ करने के लिए बड़े स्तर पर काम करना जरूरी है.

प्रदूषण रोकने के लिए कौन से उपाय किए जा रहे हैं?
दिल्ली में 47 प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान कर उनकी निगरानी और प्रबंधन के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है. वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. दिल्ली में 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से संबंधित नियमों को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन करें.

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