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Pune: 'मैं बिल्डिंग के नीचे दबा हूं.. मुझे बचा लो..' परिवार के साथ साझा की तस्वीर, जानें कैसे थे वो पल.. जब थे मलबे के नीचे

पुणे के मोशी में हुए हादसे में मृतकों की संख्या 8 पहुंच चुकी जबकी कई लोग निकाले जा चुके हैं. हर किसी की एक कहानी है. लेकिन एक कहानी ऐसी भी है जो फोटो के साथ साझा हुई. जिसे देख दिल कांप उठता है.

मलबे में दबे विजय
श्रीकृष्ण पांचाल
  • पुणे,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:15 PM IST

पुणे के मोशी में हुए दर्दनाक हादसे को 72 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है. बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की इमारत पर कूड़े का विशाल पहाड़ टूट पड़ा था. इस हादसे में 23 कर्मचारी मलबे में दब गए थे. अब तक 17 लोगों को जिंदा निकाला गया है, जबकि 8 लोगों की मौत हो चुकी है.

मलबे के बीच आई गुहार

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान इस हादसे से जिंदा बाहर निकले है विजय सपकाल. जिनकी कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है. मलबे में दबे विजय को लगा कि अब उनका बचना बिल्कुल नामुमकिन था. उन्होंने मदद के लिए अपनी पत्नी को आखिरी सेल्फी भेजी और मैसेज किया कि 'मैं बिल्डिंग के नीचे दबा हूं... जल्दी आओ...'

करीब 9 घंटे तक विजय मलबे के नीचे फंसे रहे. उनके पैर पर भारी खंभा गिरा हुआ था, चारों तरफ कांच के टुकड़े और मलबा फैला था. कूड़े के ढेर से निकल रही मीथेन गैस की वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था. इसके बावजूद विजय ने हिम्मत नहीं हारी. वे लगातार अपने साथ फंसे लोगों को आवाज देकर उनका हाल पूछते रहे और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे.

भोजन के समय गिरी इमारत

बुधवार दोपहर हादसे के वक्त विजय समेत 15 से 16 कर्मचारी पहली मंजिल की कैंटीन में खाना खा रहे थे, तभी अचानक कूड़े का पहाड़ इमारत पर आ गिरा और देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई.

क्या बताते है विजय

विजय बताते हैं कि मलबे में दबे हुए उन्हें अपनी पत्नी, अपने बेटे और पूरा परिवार आंखों के सामने दिखाई दे रहा था. उन्हें लग रहा था कि अब मौत तय है. वे लगातार भगवान का नाम जपते रहे. आखिरकार 9 घंटे बाद रेस्क्यू टीम ने उन्हें जिंदा बाहर निकाल लिया. फिलहाल उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है. विजय इसे भगवान का चमत्कार मानते हैं. उनके साथ एक और महिला कर्मचारी बच गई है.

महानगरपालिका करेगी मदद

उधर इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका की ओर से 10 लाख रुपए, महाराष्ट्र सरकार की ओर से 5 लाख रुपए और संबंधित ठेकेदार की ओर से 25 लाख रुपए की सहायता राशइ देने की घोषणा की गई है. साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है.

 

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