उत्तर प्रदेश में नहीं दिखाई दे रहा है खाद का बड़ा संकट! जानिए अलग-अलग जिलों का हाल

UP Farmers Not Facing Fertilizer Crisis: चंदौली के किसानों को खाद की एक बड़ी मात्रा में जरूरत पड़ती है. लेकिन अगर हम चंदौली की बात करें,तो यहां पर अभी लोग धान की नर्सरी डाल रहे हैं. ऐसे में हाल फिलहाल उन्हें बड़ी मात्रा में खाद की जरूरत नहीं दिखाई दे रही है.

UP Farmers Not Facing Fertilizer Crisis
उदय गुप्ता
  • चंदौली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:32 PM IST

ईरान और इजरायल-अमेरिका में लंबे समय से युद्ध जारी हैं. अमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं. इन दोनों देशोंमें छिड़े युद्ध की वजह से दुनियाभर में खाद का संकट पैदा हो गया है और खाद के लिए किसान बेहाल दिखाई दे रहे हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश से राहत भरी खबर है. यहां पर हाल फिलहाल खाद का किसी तरह का संकट दिखाई नहीं दे रहा है. हालांकि धान का सीजन है और इस सीजन में खाद की एक बड़ी मात्रा किसानों को चाहिए होती है. लेकिन फिलहाल यह संकट नहीं दिखाई दे रहा है. लेकिन कुछ जिलों में खाद की ब्लैक मार्केटिंग की भी खबरें आ रही हैं. हमने यूपी के कुछ जिलों में खाद संकट पर रियलिटी चेक किया. आईए जानते हैं उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खाद की उपलब्धता को लेकर क्या हाल है.

चंदौली में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है खाद
पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली को धान का कटोरा कहा जाता है.क्योंकि यहां पर धान की बेहतरीन उपज होती है. यहां के किसान सामान्य चावल तो पैदा करते ही हैं. साथ ही साथ यहां पर ब्लैक राइस की भी खेती पिछले कई सालों से की जा रही है. चंदौली के किसानों को खाद की एक बड़ी मात्रा में जरूरत पड़ती है. लेकिन अगर हम चंदौली की बात करें,तो यहां पर अभी लोग धान की नर्सरी डाल रहे हैं. ऐसे में हाल फिलहाल उन्हें बड़ी मात्रा में खाद की जरूरत नहीं दिखाई दे रही है. चंदौली के उन्नतशील किसान रतन कुमार सिंह बताते हैं कि फिलहाल इन दिनों धान की नर्सरी डाली जा रही है और कुछ दिनों बाद धान की रोपाई शुरू होगी. ऐसे में रोपाई के वक्त हमें खाद की जरूरत पड़ेगी. लेकिन हाल फिलहाल अभी जनपद में खाद का बहुत बड़ा संकट दिखाई नहीं दे रहा है. वही चंदौली के जिला कृषि अधिकारी विनोद यादव का कहना है कि जनपद में प्रचुर मात्रा में यूरिया सहित तमाम उर्वरक उपलब्ध है उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 485 उर्वरक वितरण केंद्र हैं और लगभग 86 सोसाइटियों के माध्यम से भी उर्वरक का वितरण कराया जाता है. ऐसे में हमारा प्रयास है कि प्रत्येक वितरण केंद्र और समिति पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए.ताकि किसानों को खाद का संकट न झेलना पड़े.

बांदा में फिलहाल खाद की समस्या नहीं, डीएम ने विभाग का कराया ऑडिट
यूपी के बांदा में इन दिनों किसान धान की फसल की बुआई के लिए तैयारी कर रहे हैं. आने वाले समय मे धान के बेड की बुआई हो जाएगी, इसके बाद जुलाई माह में बेड़ खेतो में रोपी जाएगी. स्थानीय किसान संजय ने बताया कि अभी खाद की जरूरत उतनी नही होती है, बेड़ की बुआई के बाद जब धान खेतो में रोपा जाता है तब जरूरत पड़ती है. उस वक्त किसान सरकारी केंद्रों के चक्कर लगाते हैं और उन्हें खाद नही मिल पाती. हालांकि अबकी बार डीएम अमित असेरी ने विभाग का ऑडिट कराया है, यानी जिस सोसायटी में जितने किसान रजिस्टर्ड हैं, उनका डेटा निकालकर इतनी ही खाद उस सोसायटी को उपलब्ध कराई जाएगी, प्रशासन का दावा है कि इससे कालाबजारी भी रुकेगी और सभी किसानों को खाद भी मिल पाएगी. यदि किसी सोसायटी में खाद कम पड़ी, उसकी जांच की जाएगी और गड़बड़ मिलने पर कार्रवाई होगी.

पीलीभीत मे अधिकारियो का दावा,नहीं है खाद की किल्लत !
पीलीभीत में खाद की किल्लत सरकारी आकड़ो में तो नही है.लेकिन किसानों का कहना है कि उनको उनकी जरूरत के हिसाब से खाद नही मिल रही हैं.एक एकड़ में साल में दो कट्टे खाद के किसानों को दिए जाने है,लेकिन जिन किसानों को यूरिया की जरूरत ज्यादा है, उनको खाद उनकी जरूरत के हिसाब से नही मिल पा रही है. अगर चार एकड़ खेती है तो भी सिर्फ 3 ही कट्टे साल भर में खाद के मिल रहे है. हमारे किसानों का कहना है खाद मिल रही है, लेकिन इतने में हमारी जरूरत पूरी नही हो पा रही है वही विभाग की माने तो उनके पास पर्याप्त खाद मौजूद है. पीलीभीत के उप कृषि निदेशक ने बताया हमारे पास 33 हजार मीट्रिक यूरिया है,कुछ किसान पूरे सीजन की खाद एक साथ लेना जाना चाहता है,जितनी जरूरत है उतना ले. नियम है कि एक हेक्टयर में 7 बोरी यूरिया,5 बैग dap दी जाएगी,प्राइवेट दुकानों टेगिग हो रही है इस पर अधिकारी ने कहा अगर कोई प्राइवेट संस्था ऐसा करती है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा.

सहारनपुर मे पर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध है खाद
सहारनपुर में किसानों के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है. कृषि विभाग के डिप्टी कृषि अधिकारी धर्मेंद्र पुंडीर के अनुसार 10 जून तक जिले में 17,964 मीट्रिक टन यूरिया, 6,803 मीट्रिक टन डीएपी तथा 2,439 मीट्रिक टन एनपीके खाद का स्टॉक उपलब्ध है. खरीफ सीजन को देखते हुए प्रशासन लगातार खाद भंडारों की निगरानी कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी हुई है. जिले में फिलहाल यूरिया, डीएपी और एनपीके की कोई कमी नहीं है.


फिरोजाबाद मे फिलहाल नहीं है खाद कि किल्लत,लेकिन कालाबाजारी से परेशान हैं किसान !
फिरोजाबाद जिले में किसान अब धान की फसल बोने के लिए तैयार है. जिसमें तीन हफ्ते बाद खाद की बहुत जरूरत पड़ेगी. अधिकारियो का कहना है कि जिले मे खाद की किल्लत नही है. फ़िरोज़ाबाद के डांडियामई निवासी किसान प्रवीन शर्मा का कहना है कि फिलहाल सरकारी नियम अनुसार औपचारिकताएं बहुत ज्यादा है. जिन्हें पूर्ण करने में बहुत कठिनाई हो रही है. वहीं नगला बुद्धसेन के किसान नितेश कहते हैं कि खाद की कालाबाजारी जोरों पर है. कालाबाजारी करने वाले 1350 रुपए की डीएपी की बोरी को 1700 तक बेच रहे हैं. वहीं इस बारे में जिला कृषि अधिकारी सुमित चौहान कहते हैं कि हमारे पास खाद का पर्याप्त भंडार है.किसी भी किसान को जरूरत है.तो वह संपर्क करें डीएपी की कोई किल्लत नहीं है.

मुजफ्फरनगर मे भी ब्लैक मार्केटिंग से परेशान हैं किसान
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में एक तरफ जहां खाद की कालाबाजारी की घटनाएं सामने आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ये दावा कर रहा है कि जनपद में कहीं भी कोई खाद की किल्लत नहीं है समय पर किसानों को खाद उपलब्ध हो रहा है. लेकिन हाल फिलहाल में कुछ घटनाएं खाद कालाबाजारी की सामने जरूर आई है जिसमें कृषि विभाग द्वारा दो मुकदमे दर्ज कर चार लाइसेंस को रद्द किया गया है. लेकिन इन सब से अलग किसान सुमित मलिक बताते हैं कि कहीं भी किसान को कोई खाद नहीं मिल रहा है 5 बीघा जमीन पर एक कट्टा किसानों को खाद का मिलता है वह भी समय पर उपलब्ध नहीं होता. जिसके लिए पहले किसान को अपना फॉर्म रजिस्टर्ड करना पड़ता है तब कहीं जाकर खाद मिलने की उम्मीद जगाती है लेकिन कई दिनों की वेटिंग और फिर लाइनों में लगने के बावजूद भी समय पर खाद नहीं मिल पाता है.

देवरिया मे नहीं दिखाई दी खाद कि किल्लत
देवरिया मे किसान इस समय धान की नर्सरी डालने में लगे है और अगले दो हफ्ते बाद धान की रोपाई में तेजी आएगी. हमने देवरिया में किसानों से जानने की कोशिश की कि उन्हें सरकारी गोदामों से यूरिया व डीएपी मिल पा रहा है कि नही. तो किसानों ने बताया कि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है लेकिन समस्या आ रही है फार्मर रजिस्ट्री की.जो किसान फार्मर रजिस्ट्री नही कराएगा उसे खाद यूरिया नही मिल पायेगा. विशुनपुरा गांव के रहने वाले विनय कुमार ने बताया कि खाद मिल रही है. वही बरारी गांव के रहने वाले धनन्जय मणि त्रिपाठी ने बताया कि सेंटर्स पर फर्टिलाइजर उपलब्ध है लेकिन फार्मर रजिस्ट्री नही कराने की वजह से उन्हें नही मिल पाया है. वही धनौती गांव के रहने वाले पप्पू यादव ने भी फार्मर रजिस्ट्री नही कराने से खाद नहीं मिल पा रहा है. इस मामले में जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने बताया कि जनपद में पर्याप्त मात्रा में खाद यूरिया उपलब्ध है कोई दिक्कत नही है. 21 जून के बाद खाद लेने वाले किसानों में तेज़ी आयेगी.

(इनपुट- सहारनपुर से राहुल कुमार,फिरोजाबाद से सुधीर शर्मा, पीलीभीत से सौरभ पांडे, बांदा से सिद्धार्थ गुप्ता,मुजफ्फरनगर से संदीप सैनी, देवरिया से राम प्रताप सिंह )

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