छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की एसबीआई बिल्हा शाखा से एक बड़ा ही अजब-गजब मामला सामने आया है. यहां एक महिला बैंक केशियर ने 2 करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी कर ली और कहा कि '65 लाख रुपए से ज्यादा का तो चाय/नाश्ता में खर्च हो गया है.' लेकिन इसके बाद जो सच सामने आया सबके होश उड़ गए. चलिए आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है.
दरअसल, पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एसबीआई बिल्हा शाखा के ब्रांच मैनेजर ने लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर 19 जनवरी 2025 को रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू और एसीबी मुख्यालय में केस दर्ज किया गया. इसके बाद जांच एजेंसियों ने बैंक रिकॉर्ड, खातों और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की गहराई से जांच शुरू की.
रिकॉर्ड में गड़बड़ी और संदिग्ध ट्रांजेक्शन
जांच के दौरान अधिकारियों को बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत मिले. आरोप है कि करोड़ों रुपए अलग-अलग थर्ड पार्टी खातों में RTGS के जरिए ट्रांसफर किए गए. कई ट्रांजेक्शन ऐसे मिले, जिन पर शक और गहरा हो गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि रकम को सुनियोजित तरीके से इधर-उधर किया गया.
महिला कैशियर का अजब दावा
मामला तब और ज्यादा अजब हो गया जब आरोपी महिला कैशियर से पूछताछ की गई. महिला ने दावा किया कि करीब 65 लाख रुपए बैंक के चाय-नाश्ते, खाने-पीने और दूसरे खर्चों में खर्च हो गए. उसने यह भी कहा कि किराए की बिल्डिंग की देखरेख और मरम्मत में भी बड़ी रकम लगी है. हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों को यह बात बिल्कुल भी हजम नहीं हुई. जांच अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े खर्च का कोई ठोस रिकॉर्ड फिलहाल सामने नहीं आया है. बावजूद इसके महिला बार-बार अपने बयान पर कायम रही.
भ्रष्टाचार और गबन की धाराओं में केस
मुख्य आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए), 13(2) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. एसीबी और ईओडब्ल्यू की संयुक्त जांच में कई दस्तावेजी सबूत मिलने की बात कही जा रही है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बैंक कर्मचारी सच में साइबर ठगी का शिकार हुई थी या फिर करोड़ों के गबन को छिपाने के लिए साइबर फ्रॉड की कहानी बनाई गई. जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं. वहीं सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.
रिपोर्टर: मनीष शर्मा
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