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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से EPFO वेतन सीमा के लिए दिया आदेश, कहा- 4 महीने के अंदर फैसला लो!

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने, याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका का निपटारा करते हुए यह अहम आदेश दिया है. नौटियाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन फिलहाल उन लोगों को कवरेज से बाहर रखता है जिनका मासिक वेतन 15000 रुपये से अधिक है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

पिछले 11 साल से वेतन सीमा और कर्मचारी भविष्य निधि लाभ का दायरे में आने वालों के लिए अच्छी खबर है. दरअसल, प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों के लिए अगले चार महीने उम्मीदों से भरे हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वो चार महीनों में इस बाबत ठोस निर्णय ले.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने, याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका का निपटारा करते हुए यह अहम आदेश दिया है. नौटियाल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन फिलहाल उन लोगों को कवरेज से बाहर रखता है जिनका मासिक वेतन 15000 रुपये से अधिक है.

पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए, याचिकाकर्ता को इस आदेश की प्रति के साथ दो सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को एक प्रतिवेदन देने को कहा है. साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो ईपीएफओ के लिए वेतन सीमा में बदलाव करने के बारे में 4 माह के भीतर समुचित फैसला ले. याचिकाकर्ता के वकील प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि पिछले 11 साल से हजारों कर्मचारियों के वेतन में कोई बदलाव नहीं हुआ है. जबकि केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों के कर्मचारियों के तय न्यूनतम वेतन ईपीएफओ की 15000 रुपये प्रति महीने की वेतन सीमा से काफी अधिक है.

याचिका में कहा गया है कि पिछले 70 वर्षों में वेतन सीमा का पुनरीक्षण बहुत मनमाने ढंग से हुआ है. कभी-कभी तो यह 13-14 साल के अंतराल पर हुआ है. इस दौरान महंगाई, न्यूनतम वेतन या प्रति व्यक्ति आय जैसे आर्थिक संकेतक से भी उसका कोई संबंध नहीं रखा गया. इस विसंगति की वजह से ईपीएफ योजना के तहत पहले की तुलना में आज बहुत कम कर्मचारियों को इसका लाभ मिल पा रहा है. ईपीएफओ की उप-समिति ने 2022 वेतन सीमा बढ़ाने और अधिक कर्मचारियों को योजना में शामिल करने की सिफारिश की थी. केंद्रीय बोर्ड ने उसे मंजूर भी कर लिया था. लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस पर निर्णय नहीं लिया है. वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वो चार महीनों में इस बाबत ठोस निर्णय ले.

(रिपोर्टर: संजय शर्मा)

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