प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस दौरान पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात भारत सहित दुनिया के और देशों के लिए क्यों इतनी अहम है, इसे समझने से पहले आइए जानते हैं कि आखिर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) है क्या और आज के हालात में भारत के लिए इसकी अहमियत क्या है?
क्या है शंघाई सहयोग संगठन
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक अंतर सरकारी संगठन (Intergovernmental Organisation) है. इसकी शुरुआत 1996 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं द्वारा 'शंघाई फाइव' के रूप में हुई थी. बाद में इस संगठन के छठे सदस्य के रूप में उजबेकिस्तान भी जुड़ गया.
इसके बाद 'शंघाई फाइव' का नाम बदकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया. 15 जून 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना हुई. जुलाई 2005 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था. भारत इस संगठन का सदस्य साल 2017 में बना था. वर्तमान समय में SCO यानी शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन में 10 सदस्य देश हैं. इसके अलावा दो पर्यवेक्षक देश और 14 वार्ता साझेदार देश हैं.
कौन-कौन हैं सदस्य देश
SCO के सदस्य देशों में रूस, चीन, भारत, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं.
क्या है SCO का मुख्य उद्देश्य
1. SCO का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना.
2. सीमा मुद्दों को हल करना.
3. आतंकवाद और धार्मिक अतिवाद का समाधान करना.
4. क्षेत्रीय विकास को बढ़ाना है.
शंघाई सहयोग संगठन भारत के लिए क्यों है अहम
1. शंघाई सहयोग संगठन भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरने का मौका देता है.
2. भारत का पारंपरिक साझेदार रूस है. यह संगठन भारत-रूस रिश्तों को मजबूत करने का एक अवसर देता है.
3. चीन से भारत के संबंध जटिल हैं. लेकिन यह संगठन के माध्यम से दोनों देश आमने-सामने बैठकर किसी भी मुद्दे पर बातचीत कर सकते हैं.
4. अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती ट्रेड वॉर में शंघाई सहयोग संगठन भारत को एक रणनीतिक संतुलन बनाने का मौका देता है.
5. भारत ने 16 सितंबर 2022 को समरकंद शिखर सम्मेलन में शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता संभाली थी.
इस बार SCO Summit में भारत की मौजूदगी क्यों है खास
SCO Summit चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच होने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित 20 देशों के प्रमुख SCO Summit में शामिल होंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत, चीन सहित कई देशों पर टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत के लिए SCO Summit में मौजूदगी बहुत खास हो गई है. ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. चीन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है. ऐसी उम्मीद है कि चीन की धरती से अमेरिकी टैरिफ मिसाइल का करारा जवाब दिया जाएगा.
जब एक मंच पर पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग सहित दुनिया के 20 दिग्गज नजर आएंगे तो अमेरिका तनाव में आ जाएगा. ट्रंप की नींद उड़ जाएगी. भारत के लिए एससीओ शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है क्योंकि वह चीन के साथ संबंधों में बेहतरी चाहता है. उधर, चीन इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से अपने दोस्तों के साथ अमेरिका को शक्ति प्रदर्शन दिखाने की कोशिश करेगा. SCO Summit के दौरान सदस्य देश एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. सदस्य देश एससीओ विकास रणनीति को मंजूरी दे सकते हैं. सुरक्षा व आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं.
एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी कब-कब ले चुके हैं भाग
1. 2018 (चिंगदाओ)
2. 2019 (बिश्केक)
3. 2020 (मास्को, वर्चुअल प्रारूप)
4. 2021 (दुशांबे, वर्चुअल प्रारूप)
5. 2022 (ताशकंद)
6. 2023 (नई दिल्ली, वर्चुअल प्रारूप)
7. 2024 (अस्ताना, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व किया था.)