गुजरात के प्रसिद्ध और पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में इस बार आयोजित 'सोमनाथ अमृतपर्व 2026' खास चर्चा में है. यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें संस्कृति, इतिहास और आधुनिक तकनीक की झलक भी देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ दौरे ने इस कार्यक्रम को और ज्यादा खास बना दिया. इस दौरान प्रदर्शनी से लेकर एयर शो तक कई आकर्षण लोगों के बीच चर्चा का विषय बने.
सोमनाथ में पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भगवान नटराज के समक्ष कलाओं का एक सुंदर संगम दिखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं. तो इस मौके पर उनका ढोल, डमरू-शंख बजाकर और सौ कलश नृत्य के साथ भव्य स्वागत किया जाना है. मंदिर परिसर में ओडिशा के दो कलाकारों ने भगवान शिव और सोमनाथ की रेत की मूर्ति बनाई है. सोमनाथ की 75वीं वर्षगांठ का उत्सव कई मायनों में विशेष बन रहा है. सोमनाथ मंदिर परिसर में विभिन्न कलाओं, ध्वनियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का एक अनूठा संगम रचा गया है, मानो यह आयोजन भगवान नटराज के समक्ष हो.
क्यों खास रहा इस बार का अमृतपर्व?
इस आयोजन को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया. साल 1951 में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में मंदिर को दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था. इसी ऐतिहासिक सफर को याद करते हुए इस बार का कार्यक्रम काफी भव्य तरीके से आयोजित किया गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने सोमनाथ को भारत की सांस्कृतिक ताकत और आस्था का प्रतीक बताया. पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि संघर्ष और पुनर्निर्माण की कहानी भी है, जो देश की एकता और विश्वास को दर्शाता है.
प्रदर्शनी में दिखा इतिहास और विरासत का संगम
अमृतपर्व के दौरान एक खास प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहां सोमनाथ मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण और उससे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को दिखाया गया. यहां आने वाले लोगों को मंदिर के पुराने स्वरूप, हमलों और फिर उसके पुनर्जीवन की कहानी तस्वीरों और जानकारी के जरिए समझाई गई.
एयर शो बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में एयर शो ने लोगों का खूब ध्यान खींचा. आसमान में विमानों की करतबबाजी देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. धार्मिक आयोजन के साथ इस तरह की प्रस्तुति ने माहौल को और खास बना दिया. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इसे यादगार अनुभव बताया.
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
सोमनाथ अमृतपर्व के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लोगों ने पूजा-अर्चना की और इस खास आयोजन का हिस्सा बने. कई लोगों ने इसे सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अनुभव भी बताया. इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखाया कि सोमनाथ मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है. अमृतपर्व के जरिए श्रद्धालुओं को इतिहास, आस्था और देश की विरासत से जुड़ने का मौका मिला.
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