Algae Tree
Algae Tree
देश में पहली बार वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने वाली आधुनिक एल्गी ट्री तकनीक की शुरुआत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से हुई है. विवेकानंद पार्क में इस तकनीक को सार्वजनिक रूप से स्थापित किया गया. बढ़ती गर्मी, हीटवेव और शहरों में लगातार खराब होती हवा के बीच इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
भोपाल स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शुरू हुई यह पहल भविष्य में दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है. खास बात यह है कि यह तकनीक पारंपरिक पेड़ों की तरह सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ाती, बल्कि हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को तेजी से अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ने का काम करती है.
क्या है एल्गी ट्री तकनीक?
एल्गी ट्री को Mushroom World Group ने विकसित किया है. यह एक माइक्रोएल्गी आधारित सिस्टम है, जिसमें विशेष प्रकार की सूक्ष्म शैवाल (Microalgae) का इस्तेमाल किया जाता है. ये सूक्ष्म जीव प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के जरिए हवा से कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं.
दो साल में बनकर तैयार हुई ये तकनीक
कंपनी के अनुसार इस तकनीक को विकसित करने में करीब दो साल का समय लगा. इस दौरान 50 से अधिक वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की टीम ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया. तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे पार्क, सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से लगाया जा सके.
एक यूनिट का असर 25 पेड़ों जितना
कंपनी का दावा है कि ‘एल्गी ट्री’ की एक यूनिट लगभग 25 वयस्क पेड़ों के बराबर कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर सकती है. यह सिस्टम सालभर में करीब 1.5 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता रखता है. तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलते शहरों में जहां बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना हमेशा संभव नहीं होता, वहां ऐसी तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है. इससे न केवल वायु गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि शहरी इलाकों में तापमान संतुलित रखने में भी मदद मिलेगी.
दूसरे शहरों में भी लगाने की तैयारी
भोपाल देश का पहला शहर बन गया है जहां इस तकनीक को सार्वजनिक तौर पर लागू किया गया है. अब कंपनी की योजना इसे देश के दूसरे शहरों के सार्वजनिक स्थलों, संस्थानों, मेट्रो स्टेशनों और व्यस्त बाजारों में लगाने की है.
-धर्मेन्द्र साहू की रिपोर्ट