उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला अब तेजी से विकास की नई पहचान बनता जा रहा है. 'भारत की ऊर्जा राजधानी' के रूप में प्रसिद्ध यह जिला न केवल बिजली उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि उद्योग, सिंचाई और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. सोनभद्र में वर्तमान में करीब 12,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसे आने वाले समय में 20,000 मेगावाट तक बढ़ाने की योजना है.
इसके साथ ही जिले में दो बड़े पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 4,150 मेगावाट होगी और इन पर लगभग ₹40,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा. जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का काम भी तेजी से चल रहा है. जिले के 3.94 लाख से अधिक घरों में पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 81 प्रतिशत कार्य 2024 के अंत तक पूरा हो चुका है. वहीं, कनहर सिंचाई परियोजना से 35,000 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे 50,000 से ज्यादा किसान परिवार लाभान्वित होंगे.
आर्थिक विकास की बात करें तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सोनभद्र को लगभग ₹1.97 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. इससे करीब 40,000 युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है. जिले में उद्योगों की संख्या बढ़ रही है और हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है.
सरकारी योजनाओं का असर भी साफ दिख रहा है. नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम में सोनभद्र लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. साथ ही आदिवासी विकास और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सैकड़ों परियोजनाएं शुरू की गई हैं. कुल मिलाकर, सोनभद्र अब ऊर्जा के साथ-साथ समग्र विकास का भी मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है.
रिपोर्टर: विधु शेखर मिश्रा
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