छात्रों को स्पेस से जोड़ने की पहल, IIT धनबाद पहुंचा ISRO का अंतरिक्ष मॉडल बस, स्टूडेंट्स में दिखा उत्साह

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की 'स्पेस ऑन व्हील्स' बस अभी धनबाद में छात्रों का मार्गदर्शन कर रही है. इस मॉडल को देख कर छात्रों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इसका मकसद स्टूडेंट्स को स्पेस से जोड़ना है.

स्पेस ऑन व्हील्स
gnttv.com
  • धनबाद ,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:37 PM IST

आईआईटी आइएसएम धनबाद का कैंपस इन दिनों अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक दुनिया से सराबोर है. नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, हैदराबाद द्वारा संचालित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की 'स्पेस ऑन व्हील्स' बस यहां पहुंच चुकी है. यह बस छात्रों और आगंतुकों को अंतरिक्ष तकनीक को करीब से समझने का अनोखा अवसर दे रही है. बस के भीतर प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है मानो ज्ञान की एक छोटी अंतरिक्ष यात्रा शुरू हो गई हो.

मॉडल और सिमुलेशन से सीखने का अवसर
बस के अंदर भारतीय प्रक्षेपण यानों के कार्यशील स्केल मॉडल, रॉकेट लॉन्च के सिमुलेशन और अंतरिक्ष तकनीक के विकास को दर्शाते हुए विस्तृत प्रदर्शन लगाए गए हैं. प्रदर्शनी में भारत के प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े मॉडल और दृश्य भी शामिल हैं. ये प्रदर्शन युवाओं को विज्ञान और इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं. यह बस सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का चलता-फिरता संग्रहालय है, जो रॉकेट, उपग्रह और अंतरग्रहीय मिशनों को जीवंत रूप में सामने लाती है.

छात्रों के लिए ज्ञान और संवाद का मंच
आईआईटी धनबाद के छात्र, कर्मचारी और उनके परिजन इसका भ्रमण कर रहे हैं, जबकि अन्य छात्र, पूर्व छात्र और आगंतुक छह से आठ फरवरी तक इस प्रदर्शनी का लाभ उठा सकते हैं. प्रदर्शनी में पृथ्वी की कक्षा में घूमते उपग्रहों और पेलोड सिस्टम के मॉडल यह समझाते हैं कि उपग्रहों को कैसे डिजाइन और सुरक्षित रूप से लॉन्च किया जाता है. क्रू एस्केप सिस्टम मानव अंतरिक्ष उड़ान में सुरक्षा तकनीक को दर्शाता है, जबकि रिमोट सेंसिंग उपग्रह रोजमर्रा की जिंदगी में अंतरिक्ष तकनीक की उपयोगिता बताते हैं.

अंतरिक्ष डेटा की उपयोगिता का सरल परिचय
विशेषज्ञ डेमो, क्विज और चर्चा के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को आसान भाषा में समझा रहे हैं. सैटेलाइट इमेजरी और इंटरएक्टिव डिस्प्ले मौसम पूर्वानुमान, जलवायु अध्ययन, आपदा प्रबंधन, कृषि, वन मानचित्रण, जल संसाधन योजना, दूरसंचार, टेलीमेडिसिन, नागरिक उड्डयन और समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष डेटा के उपयोग को स्पष्ट करते हैं. शुरुआती उपग्रहों से आधुनिक अभियानों तक की यह प्रस्तुति भारत की वैज्ञानिक प्रगति की कहानी कहती है.

(रिपोर्ट- सिथुन मोदक)

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