Netaji Subhash Chandra Bose Life in 10 Line: सुभाष चंद्र बोस देश के उन महानायकों में से एक हैं, जिन्होंने आजादी की लड़ाई के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. जिन्हें आज के समय में ज्यादातर लोग नेताजी के नाम से भी जानते हैं. 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती आने वाली है. जिसे 'पराक्रम दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है. ब्रिटिश शासन से देश की आजादी की लड़ाई के दौरान नेताजी ने देश को कई देशभक्ति नारों से नवाजा. जिनमें से कुछ हैं- तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हें आजादी दूंगा, जय हिन्द, दिल्ली चलो. इन सब मे से तो 'जय हिंद' का नारा राष्ट्रीय नारा बन गया. तो चलिए आज आपको सुभाष चंद्र बोस के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं.
- सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक शहर में हुआ. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था. सुभाष चंद्र बोस के 14 भाई बहन थे. वह अपने माता-पिता की 9वीं संतान थे.
- सुभाष चंद्र बोस ने इंडियन सिविल सर्विस की परीक्षा पास की थी. जिसमें उन्हें चौथा रैंक प्राप्त हुआ था. लेकिन उन्होंने भारत को अंग्रेजों से आजाद कराने के लिए इस पद की बलि चढ़ा दीयाऔर 22 अप्रैल 1921 को उन्होंने इस पद से त्यागपत्र दे दिया.
- सुभाष चंद्र बोस पहली बार गांधी जी से 20 जुलाई 1921 में मिले थे. जिसके बाद गांधी जी की सलाह पर वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे.
- वे जब कलकत्ता महापालिका के प्रमुख अधिकारी बने तो उन्होंने कलकत्ता के रास्तों का अंग्रेजी नाम हटाकर भारतीय नाम पर कर दिया.
- देश की आजादी के लिए सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद फौज सरकार की स्थापना की. जिसे 9 देशों की सरकारों ने मान्यता दी थी जिसमें जर्मनी, जापान और फिलीपींस भी शामिल थे.
- 1934 ई. में नेताजी को अपनी पुस्तक टाइप कराने के लिए एक टाइपिस्ट की जरूरत थी. उन्हें एमिली शेंकल नाम की एक टाइपिस्ट महिला मिली. 1942 में सुभाष ने इस टाइपिस्ट से शादी कर ली.
- 1942 में सुभाष चंद्र बोस को जर्मनी में भारतीय सैनिकों और भारतीय अधिकारियों द्वारा 'नेताजी' की उपाधि दी गई.
- सुभाष चंद्र बोस अपनी फौज के साथ 1944 में म्यांमार पहुंचे. यहीं पर उन्होंने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारा लगाया था.
- दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस ने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी, जापान जैसे देशों से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सहयोग मांगा था. जिसके बाद से सभी राजनीतिक दलों ने उन पर फासीवादी ताकतों के साथ नजदीकी रिश्ते होने का आरोप लगाया.
- 18 अगस्त 1945 को वे हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे. इस सफर के दौरान ताइहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई. उनकी मौत भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य बनी हुई है. उनकी रहस्यमयी मौत पर समय-समय पर कई तरह की अटकलें सामने आती रहती हैं.
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