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सूरत में गहराया गैस संकट, चूल्हे ठंडे पड़े तो घर की ओर लौटने लगे श्रमिक, औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप

गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं. हीरा और टेक्सटाइल नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले इस शहर में गैस की कमी का सबसे बड़ा असर प्रवासी श्रमिकों पर पड़ा है. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

सूरत में गैस संकट से बढ़ा श्रमिकों का पलायन
gnttv.com
  • सूरत ,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं. हीरा और टेक्सटाइल नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले इस शहर में गैस की कमी का सबसे बड़ा असर प्रवासी श्रमिकों पर पड़ा है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हजारों श्रमिक मजबूर होकर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं. उधना रेलवे स्टेशन पर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने वाले श्रमिकों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.

सूरत में गैस की भारी किल्लत
सूरत में पिछले कुछ समय से घरेलू और कमर्शियल गैस की भारी कमी देखने को मिल रही है. इस संकट का सबसे ज्यादा असर उन श्रमिक परिवारों पर पड़ा है, जो रोज कमाकर खाने वाले हैं और छोटे किराये के कमरों में रहते हैं. इन श्रमिकों के नाम पर न तो मकान होता है और न ही उनके पास आधिकारिक गैस कनेक्शन होता है. ऐसे में वे आमतौर पर छोटे गैस सिलेंडर भरवा कर अपना गुजारा करते हैं. देशभर में गैस की कमी का असर यहां भी देखने को मिल रहा है. गैस की उपलब्धता कम होने के कारण छोटे सिलेंडरों की कालाबाजारी तेजी से बढ़ गई है. हालात यह हैं कि जो गैस सिलेंडर सामान्य तौर पर लगभग 500 रुपये में मिलता था, वही अब काला बाजार में चार गुना तक कीमत पर बेचा जा रहा है.

महंगी गैस और भूख से जूझते श्रमिक
गैस की कमी के कारण कई श्रमिक परिवारों के घरों में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है. मजबूरी में कुछ लोग बाहर का खाना खा रहे हैं, लेकिन महंगाई के कारण यह रोज संभव नहीं है. कई परिवारों ने लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेने की कोशिश की, लेकिन किराये के मकान में रहने के कारण मकान मालिकों ने सुरक्षा और धुएं का हवाला देकर इसकी अनुमति नहीं दी. ऐसे हालात में श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या अपने परिवार का पेट भरने की हो गई है. यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं.

उधना रेलवे स्टेशन पर बढ़ती भीड़
आमतौर पर सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर गांव लौटने वाले श्रमिकों की भीड़ त्योहारों के समय दिखाई देती है. लेकिन इस समय कोई बड़ा त्योहार नहीं है, फिर भी स्टेशन पर यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. ज्यादातर लोग टेक्सटाइल उद्योग में काम करने वाले श्रमिक हैं, जो गैस की समस्या से परेशान होकर घर लौटने को मजबूर हैं. स्टेशन और बस स्टैंड पर अपने सामान के साथ बैठे श्रमिकों की लंबी कतारें इस संकट की गंभीरता को साफ दिखा रही हैं.

उद्योगों पर भी पड़ सकता है असर
श्रमिकों के इस बड़े पैमाने पर पलायन से सूरत के उद्योगों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. टेक्सटाइल और लघु उद्योगों में काम करने वाले कारीगरों की संख्या घटने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है. यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो शहर की औद्योगिक व्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.

रिपोर्टर: संजय सिंह राठौड़

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