सूरत में बाढ़ के बाद एक्शन मोड में सरकार... 14 मौतों की पुष्टि, हजारों परिवारों को राहत, तेजी से चल रहा सर्वे

सूरत में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के आदेशानुसार सूरत शहर के प्रभावित इलाकों का जनजीवन पटरी पर लाने के लिए तेजी से काम शुरू कर दिया गया है.

CM Bhupendra Patel
अतुल तिवारी
  • सूरत ,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:36 PM IST

सूरत में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर प्रभावित इलाकों में जनजीवन सामान्य करने के लिए राहत और पुनर्वास कार्य तेज कर दिए गए हैं. शहर और जिले से बाढ़ का पानी उतरने के बाद मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने देर रात सभी कोऑर्डिनेशन अधिकारियों, सूरत नगर निगम और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाई-लेवल रिव्यू बैठक की.

सरकार ने फिलहाल तीन प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं. बाढ़ के पानी की जल्द निकासी, तेजी से सफाई अभियान और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा. प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि अगले 48 से 72 घंटे के भीतर बाढ़ प्रभावित सभी बाजार, दुकानें और जनजीवन सामान्य कर दिया जाए.

9,100 परिवारों का सर्वे, 800 से अधिक को मिली आर्थिक मदद
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन दिन-रात काम कर रहा है. अब तक करीब 9,100 परिवारों का डोर-टू-डोर सर्वे पूरा किया जा चुका है. इनमें से 800 से अधिक प्रभावित परिवारों को घरेलू उपयोग का सामान और 6,800 रुपये की नकद सहायता दी जा चुकी है. बाकी परिवारों तक भी जल्द राहत पहुंचाने के लिए अलग-अलग टीमें तैनात की गई हैं.

58 इलाकों में नुकसान का सर्वे, व्यापारियों को मिलेगी राहत
हर्ष संघवी ने बताया कि सूरत शहर की 58 छोटी-बड़ी गलियों, मोहल्लों और व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों और बाजारों को हुए नुकसान का सर्वे जल्द पूरा कर लिया जाएगा. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में व्यापारियों के लिए आर्थिक सहायता पर फैसला लिया जाएगा. यदि किसी क्षेत्र या सोसायटी का सर्वे तकनीकी कारणों से छूट जाता है, तो उसके लिए कलेक्टर कार्यालय में एक विशेष प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है. साथ ही एक हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किया गया है. शिकायत मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर तुरंत सर्वे करेगी. सूरत में दो दिन पहले हुई भारी बारिश के कारण अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि कलेक्टर कार्यालय ने की है. वहीं छह अन्य मौतों की जांच जारी है. ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है. नियमानुसार मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.

8,324 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
राज्य में मानसून के दौरान हुई भारी बारिश के चलते अब तक 11 जिलों से 8,324 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और 3,711 लोगों का रेस्क्यू किया गया है. सूरत में अब तक 4,683 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया, जबकि 3,416 लोगों को बचाव अभियान के जरिए सुरक्षित निकाला गया.

भविष्य में बाढ़ रोकने के लिए बनेगा एक्शन प्लान
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत के खाड़ी क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान पर जोर दिया है. उन्होंने भविष्य में भारी बारिश और बाढ़ के दौरान प्रशासनिक कमियों को रोकने के लिए तत्काल एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार सूरत की खाड़ी में बाढ़ की स्थायी समस्या के समाधान और उसके विकास के लिए 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी.

गुजरात में बारिश का असर हुआ कमजोर
गुजरात में अब बारिश का दौर काफी कमजोर पड़ गया है. पिछले 24 घंटे में सुबह 6 बजे तक केवल दो जिलों के दो तालुकों में बारिश दर्ज की गई. नर्मदा जिले के गरुड़ेश्वर और पंचमहल जिले के गोधरा तालुका में केवल 1-1 मिमी बारिश हुई. मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान राज्य में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है. हालांकि मछुआरों को 12 जुलाई तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है.

मानसून सीजन में अब तक 24.63 प्रतिशत बारिश
इस मानसून सीजन में गुजरात में अब तक औसतन 24.63 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है. इसमें दक्षिण गुजरात में सबसे अधिक 34.69 प्रतिशत, सौराष्ट्र में 27.61 प्रतिशत, मध्य गुजरात में 17.31 प्रतिशत, उत्तर गुजरात में 14.09 प्रतिशत और कच्छ में 1.92 प्रतिशत बारिश हुई है.

राज्यभर में NDRF और SDRF की टीमें तैनात
बारिश की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने 12 NDRF और 26 SDRF टीमों को अलग-अलग जिलों और शहरों में तैनात किया है. सरदार सरोवर बांध में फिलहाल 2,19,922 एमसीएफटी पानी संग्रहित है, जो इसकी कुल क्षमता का 65.83 प्रतिशत है. वहीं राज्य के 206 जलाशयों में 2,29,660 एमसीएफटी पानी मौजूद है, जो उनकी कुल क्षमता का 41.17 प्रतिशत है. इनमें 10 जलाशय हाई अलर्ट, 4 अलर्ट और 10 चेतावनी (वार्निंग) स्तर पर हैं.

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