सोनमर्ग की खूबसूरती पर खतरा, तेजी से गायब हो रहा थाजीवास ग्लेशियर, वैज्ञानिकों ने दी बड़ी चेतावनी

सोनमर्ग को उसकी बर्फीली वादियों और थाजीवास ग्लेशियर के लिए जाना जाता है. हर साल हजारों पर्यटक यहां घूमने आते हैं. लेकिन, एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्लेशियर की करीब 95 प्रतिशत बर्फ गायब हो चुकी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पानी की कमी और पर्यावरण से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

thajiwas glacier
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल सोनमर्ग से एक चिंताजनक खबर सामने आई है. यहां का मशहूर थाजीवास ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है और अब लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्लेशियर की करीब 95 प्रतिशत बर्फ गायब हो चुकी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में पानी की कमी और पर्यावरण से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

कश्मीर विश्वविद्यालय और नई दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि थाजीवास ग्लेशियर कभी करीब 54 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था. लेकिन अब यह सिकुड़कर सिर्फ 2.5 वर्ग किलोमीटर रह गया है. वैज्ञानिकों ने इसे एक ऐसे ग्लेशियर का बचा हुआ छोटा हिस्सा बताया है, जो कभी बहुत बड़ा हुआ करता था.

बदल गई सोनमर्ग की तस्वीर
सोनमर्ग को उसकी बर्फीली वादियों और थाजीवास ग्लेशियर के लिए जाना जाता है. हर साल हजारों पर्यटक यहां घूमने आते हैं. लेकिन अब यहां पहले जैसी बर्फ दिखाई नहीं देती. जहां कभी दूर-दूर तक सफेद बर्फ फैली रहती थी, वहां अब घास के मैदान और सूखी जमीन नजर आती है. इससे इलाके की खूबसूरती भी प्रभावित हुई है.

आखिर क्यों पिघल रहा है ग्लेशियर?
ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के पीछे कई कारण हैं, सबसे बड़ा कारण ग्लोबल वार्मिंग यानी धरती का बढ़ता तापमान है. इसके अलावा सर्दियों में कम बर्फबारी होना, प्रदूषण और बढ़ता पर्यटन भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. वाहनों और अन्य स्रोतों से निकलने वाला ब्लैक कार्बन बर्फ पर जम जाता है, जिससे बर्फ जल्दी पिघलने लगती है.

पानी की कमी का बढ़ सकता है खतरा
थाजीवास ग्लेशियर से निकलने वाला पानी सिंध नदी में जाता है. यह नदी आसपास के लोगों और खेती के लिए काफी महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ग्लेशियर इसी तरह खत्म होता रहा तो भविष्य में पानी की कमी की समस्या बढ़ सकती है. इसका असर खेती, बागवानी और बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है.

ऐसे में ग्लेशियर को बचाने के लिए प्रदूषण कम करने, वाहनों की संख्या नियंत्रित करने और पर्यटन गतिविधियों पर निगरानी रखने की सलाह दी जा रही है. साथ ही लोगों से पर्यावरण की रक्षा के लिए जागरूक होने की अपील भी की गई है.

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