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कौन हैं Padma Subrahmanyam, जिनकी चिट्ठी के बाद शुरू हुई थी Sengol की तलाश, उस खत में क्या था खास

Sengol History: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद राजदंड 'सेंगोल' की तलाश का काम अफसरों को सौंपा था. सरकार को इस ऐतिहासिक धरोहर की जानकारी मशहूर डांसर पद्मा सुब्रह्मण्यम की एक चिट्ठी से मिली थी, जिसे उन्होंने 2 साल पहले पीएमओ को लिखी थी.

मशहूर डांसर पद्मा सुब्रह्मण्यम ने चिट्ठी लिखकर सेंगोल के बारे में जानकारी दी थी
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2023,
  • अपडेटेड 3:16 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे. साल 1947 में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक सेंगोल को संसद भवन में स्थापित किया जाएगा. इस ऐतिहासिक धरोहर को भुला दिया गया था. बहुत कम लोगों के पास इसके बारे में जानकारी रह गई थी. लेकिन अब पूरा देश इसके महत्व को समझेगा. इसे संसद भवन में स्पीकर के पोडियम पर रखा जाएगा. लेकिन इस सेंगोल के बारे में सरकार को कहां से जानकारी मिली? किसने इस ऐतिहासिक धरोहर के बारे में सरकार को बताया? दरअसल मशहूर डांसर पद्मा सुब्रह्मण्यम की एक चिट्ठी से सरकार को इस महत्वपूर्ण सेंगोल के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंगोल के ढूंढने के लिए अफसरों की एक टीम बनाई. जिसकी बदौलत आज पूरा देश इस धरोहर के बारे में जान पाया है.

एक चिट्ठी से सरकार को मिली जानकारी-
2 साल पहले एक चिट्ठी से सरकार को सेंगोल के बारे में जानकारी मिली थी. जिसके बाद सरकार ने इसकी तलाश शुरू की. ये चिट्ठी मशहूर डांसर पद्मा सुब्रह्मण्यम ने पीएमओ को लिखी थी. संस्कृति मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक मशहूर डांसर पद्मा ने चिट्ठी में तमिल मैगजीन 'तुगलक' में छपे एक आर्टिकल का जिक्र किया था. मैगजीन में ये लेख मई 2021 में छपा था. इस लेख में ये बताया गया था कि 14 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतर के तौर पर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को सेंगोल सौंपा गया था. पद्मा सुब्रह्मण्यम ने सरकार से इसकी जानकारी 15 अगस्त के मौके पर सार्वजनिक करने की अपील की थी.

आजादी से कुछ मिनट पहले हुआ था सेंगोल समारोह-
इसके बाद कल्चर मिनिस्ट्री एक्शन में आई. मिनिस्ट्री ने सेंगोल की तलाश के लिए एक टीम बनाई. जो इसकी खोज में जुट गई. इस अभियान में इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स के एक्सपर्ट्स का भी साथ मिला. ये सेंगोल को अब तक पहले पीएम नेहरू के प्रयागराज वाले घर पर रखा गया था, जो अब म्यूजियम बन गया है. 15 अगस्त 1947 को आधी रात को आजादी मिलने से कुछ मिनट पहले ही सेंगोल सौंपने का समारोह आयोजित हुआ था.
अखबार को आईजीएनसीए के सेक्रेटरी सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि उस समय देश विभाजन और हिंसा से परेशान था. इसलिए ये समारोह जल्दबाजी में आयोजित किया गया था और ये कोई औपचारिक मामला नहीं था. इसलिए इसका कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया था. जिसका नतीजा ये हुआ कि सेंगोल से संबंधित सभी यादें धूमिल हो गईं.

2017 में तमिल मीडिया पर उछला था मुद्दा-
साल 2017 में एक बार फिर तमिल मीडिया में सेंगोल को लेकर रिपोर्ट छपने लगी. रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे सत्ता हस्तांतरण के लिए भारत सरकार ने तमिलनाडु के चोल साम्राज्य के सेंगोल मॉडल को अपनाया था. प्रधानमंत्री नेहरू को पवित्र तमिल पाठ थेवारम के गायन के बीच नंदी वाले सेंगोल को सौंपा गया था.

आजादी के समय 15 हजार रुपए थी सेंगोल की कीमत-
इस सुनहरे सेंगोल पर सोने की परत थी और उसमें महंगे आभूषण लगे थे. इसकी कीमत उस वक्त 15 हजार रुपए थी. इसे चेन्नई के एक हीरा कारोबारी ने बनाया था, जिसका नाम वुमिदी बंगारु चेट्टी एंड सेन्स था. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक वुमिदी बंगारु चेट्टी सन्स ने सेंगोल बनाने की पुष्टि भी की. हालांकि परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य की उम्र 95 साल है, लेकिन वो इसके बारे में ज्यादा जानकारी देने की स्थिति में नहीं थे. रिपोर्ट के मुताबिक उनके घर में इस इवेंट की एक तस्वीर थी.

कौन हैं पद्मा सुब्रह्मण्यम-
पद्मा सुब्रह्मण्यम एक मशहूर डांसर हैं. उनका जन्म 4 फरवरी 1943 को मद्रास में हुआ था. उनके पिता कृष्णस्वामी सुब्रह्मण्यम फेमस डायरेक्टर थे और उनकी मां मीनाक्षी सुब्रह्मण्यम संगीतकार थीं. जब पद्मा 14 साल की थीं, उस समय से ही वो डांस सीखना शुरू कर दिया था. पद्मा ने संगीत में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और डांस में पीएचडी किया. उन्होंने कई रिसर्च पेपर और किताबें लिखीं. 
पद्मा सुब्रह्मण्यम को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. साल 1981 में उनको पद्मश्री ने नवाजा गया. साल 2003 में उनको पद्म भूषण पुरस्कार मिला. उन्होंने अपने डांसिंग करियर में 100 से ज्यादा अवॉर्ड्स जीते हैं.

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