ऊधम सिंह नगर की किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका में मतगणना के बाद कांग्रेस ने हाई कोर्ट के पुराने आदेश को लेकर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तत्काल मतगणना कराई गई और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो गई, तो पहले कानून-व्यवस्था का हवाला देकर तीन हफ्ते की देरी क्यों की गई.
किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप ने भाजपा के संदीप अरोड़ा को 6,200 वोटों से हरा दिया. वहीं सिरौली कला नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की राशिदा बेगम ने निर्दलीय प्रत्याशी फरहीन जहां को 1,773 वोटों से शिकस्त दी. सिरौली कला के पहली बार नगर पालिका बनने के बाद कांग्रेस ने यहां भी अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की.
हाई कोर्ट में कानून-व्यवस्था का दिया गया था हवाला
दरअसल, मतदान के बाद मतगणना को लेकर मामला नैनीताल हाई कोर्ट पहुंचा था. जिला प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए मतगणना के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था. हाई कोर्ट की खंडपीठ ने प्रशासन और सरकार की दलीलों को देखते हुए मतगणना के लिए तीन हफ्ते का समय दिया था.
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए तत्काल मतगणना कराने के निर्देश दिए. इसके बाद दोनों नगर पालिकाओं में मतगणना हुई और कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की.
करण माहरा ने जांच की मांग की
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और चार्जशीट समिति के अध्यक्ष करण माहरा ने पूरे मामले की जांच की मांग की है. उन्होंने डीएम और एसएसपी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाई कोर्ट में दलील दी गई थी कि मतगणना से पहले असलहे जमा कराने हैं और छात्रसंघ चुनाव भी चल रहे हैं. माहरा ने सवाल किया कि अगर असलहे चुनाव से पहले जमा होते हैं, तो फिर इन्हें अब तक जमा क्यों नहीं कराया गया था.
कांग्रेस बोली- 'वोट चोरी' से बच गई
कांग्रेस उपाध्यक्ष सुजाता पॉल ने भी हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि तीन हफ्ते का समय दिया जाना अजीब था, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल मतगणना के आदेश दिए. कांग्रेस नेताओं का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मतगणना समय पर हुई और इससे 'वोट चोरी' की आशंका से बचाव हुआ.
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