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उत्तर प्रदेश और यामानाशी ने खोला पर्यटन सहयोग का नया अध्याय, बौद्ध सर्किट बनेगा जापान से जुड़ाव का आधार

लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) में आयोजित कार्यक्रम में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी और डिप्टी-गवर्नर जुनिची इशिदेरा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया. संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूद सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन गतिविधियों और संस्थागत सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की.

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026
समर्थ श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार अब अपने तेजी से विकसित हो रहे बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. इस कड़ी में जापान को प्रदेश का एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को यामानाशी प्रीफेक्चर के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुए संवाद सत्र में कहा कि 'यामानाशी, जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है.'

लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) में आयोजित कार्यक्रम में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी और डिप्टी-गवर्नर जुनिची इशिदेरा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया. संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूद सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन गतिविधियों और संस्थागत सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की. यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 के दो दिन बाद हुई. 

बौद्ध सर्किट को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बौद्ध पर्यटन के विकास की सोच में व्यापक बदलाव आया है. अब सरकार का फोकस केवल स्मारकों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और पर्यटन स्थलों पर बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने पर भी है. उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है. अब सरकार की प्राथमिकता इस विकास को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की है. मंत्री ने यह भी कहा कि भगवान बुद्ध की विरासत सदियों से भारत और जापान के लोगों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ती रही है, इसलिए जापान उत्तर प्रदेश के लिए एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार है.'

यामानाशी बनेगा जापान में यूपी पर्यटन का नया प्रवेश द्वार- जयवीर सिंह
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'यामानाशी जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा यामानाशी को उत्तर प्रदेश के पर्यटन के लिए जापान में एक मजबूत प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की है. वहीं, उत्तर प्रदेश को बौद्ध धर्म, अध्यात्म, वेलनेस और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले जापानी पर्यटकों के लिए स्वाभाविक पर्यटन गंतव्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशाम्बी और संकिसा जैसे स्थल भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी यात्राओं के अलग-अलग अध्यायों से पर्यटकों को जोड़ते हैं.'

'आर्थिक प्रगति और बौद्ध विरासत से निवेशकों को लुभा रहा यूपी'
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश अब सिर्फ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ही नहीं, अपितु तेज आर्थिक विकास और मजबूत होते बुनियादी ढांचे के कारण भी निवेशकों की पसंद बन रहा है. उन्होंने कहा कि हाईवे, नागरिक उड्डयन, उद्योग और निवेश के क्षेत्र में प्रदेश ने तेजी से प्रगति की है. साथ ही उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध से जुड़े छह प्रमुख स्थलों की भूमि है, जहां जापानी पर्यटकों को शांति और आध्यात्मिक अनुभव के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले आगे बढ़ाया जाना उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ते संवाद और मजबूत होते संबंधों का सकारात्मक संकेत है.' अमृत अभिजात ने जापानी निवेशकों को प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का लाभ उठाने और पर्यटन उत्पादों व अनुभवों के विकास में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया.

उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता को कोइजुमी ने सराहा
यामानाशी के पर्यटन, संस्कृति एवं खेल विभाग के महानिदेशक योशीयुकी कोइजुमी ने उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता और प्रतिनिधिमंडल के आत्मीय स्वागत की सराहना की. उन्होंने कहा कि 'प्रदेश में विरासत, आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का अनूठा संगम है. कोइजुमी ने यह भी कहा कि यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच मौजूद गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध दोनों प्रान्त के लोगों के बीच पर्यटन, आपसी आदान-प्रदान और बेहतर समझ को बढ़ावा देने का मजबूत आधार बन सकते हैं.'

दोनों ओर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने पर संवाद
संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए व्यावहारिक अवसरों और आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई. इस बीच, टॉर्नोस के संस्थापक एवं सीईओ तथा फिक्की पर्यटन समिति के अध्यक्ष प्रतीक हीरा ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश और जापान की साझा सांस्कृतिक विरासत पर्यटन सहयोग के लिए स्वाभाविक आधार तैयार करती है. उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध की भूमि है और जापान में शिव, गणेश, सरस्वती, कुबेर, लक्ष्मण और यहां तक कि भगवान कृष्ण जैसे भारतीय देवी-देवताओं के प्रति भी श्रद्धा का भाव देखने को मिलता है. यामानाशी को जापान के 'फ्रूट बाउल' के रूप में जाना जाता है और उत्तर प्रदेश की मजबूत कृषि पहचान दोनों क्षेत्रों के बीच एक और समानता है. उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ष करीब दो लाख भारतीय जापान की यात्रा करते हैं और दोनों दिशाओं में पर्यटन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं.'

सत्र के दौरान तबीज़ुकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के राजन कुमार ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश की आतिथ्य परंपरा और खान-पान जापानी पर्यटकों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का अहम माध्यम बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत का समृद्ध इतिहास और विविधता, उत्तर प्रदेश की आतिथ्य परंपरा तथा लखनऊ के मशहूर खानपान को जापान की प्रसिद्ध खाद्य संस्कृति के साथ जोड़कर पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं.'

जापानी पर्यटकों के अनुरूप आतिथ्य सुविधाओं पर जोर
पर्यटन पर संवाद सत्र में जापानी पर्यटकों की जरूरतों और उनकी पसंद के अनुरूप आतिथ्य सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया. लोटस निक्को की नेहा राय ने कहा कि 'जापानी पर्यटकों के लिए विश्वसनीयता, समयबद्ध सेवाएं और खान-पान का विशेष महत्व है. उन्होंने बताया कि उनका समूह श्रावस्ती और कुशीनगर में होटल संचालित कर रहा है और जापानी पर्यटक बाजार के साथ भी उसका अनुभव रहा है. बौद्ध सर्किट से गुजरने वाले जापानी पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए इन होटलों में जापानी भोजन की भी व्यवस्था की गई है.'

शीराज टूर्स की निदेशक हिना शीराज जैदी ने कहा कि 'दोनों देशों के बीच पर्यटन को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है. खासकर युवा भारतीय पर्यटक जापानी संस्कृति, खान-पान, चेरी ब्लॉसम, माउंट फूजी और वहां के आधुनिक पर्यटन आकर्षणों को लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि स्कूल समूहों की यात्राएं भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समझ बढ़ाने और लोगों से लोगों के संपर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.'

बौद्ध पर्यटन को मिल रही रफ्तार- मृदुल चौधरी
विशेष सचिव एवं पर्यटन निदेशक मृदुल चौधरी ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन के नए चरण के लिए जरूरी पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में जुटी है. उन्होंने बताया कि राज्य योजना के तहत बौद्ध स्थलों पर 51 पर्यटन परियोजनाओं पर 218 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं. वहीं, विश्व बैंक की सहायता से सारनाथ और कुशीनगर में एकीकृत पर्यटन विकास की योजना पर काम चल रहा है, जबकि श्रावस्ती में एसएएससीआई के तहत बड़े स्तर पर विकास कार्य प्रस्तावित हैं. उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास पर्यटन सुविधाओं, स्थलों की बेहतर व्याख्या, आतिथ्य सेवाओं और विभिन्न बौद्ध स्थलों के बीच सुगम आवागमन को एक साथ विकसित करने का है, ताकि पर्यटक पूरे बौद्ध सर्किट को अलग-अलग पड़ावों के बजाय एक संपूर्ण यात्रा के रूप में अनुभव कर सकें.'

बौद्ध पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के बौद्ध पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत किया है. प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों पर वर्ष 2022 में 22.4 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 81.8 लाख से अधिक हो गए. इसी अवधि में विदेशी पर्यटकों की संख्या 48 हजार से बढ़कर करीब 4.43 लाख पहुंच गई. वर्ष 2026 में जनवरी से जून के बीच ही बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर 30.07 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 2.02 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे.

यूपी और यामानाशी मिलकर बढ़ाएंगे पर्यटन, एमओयू पर हस्ताक्षर
उत्तर प्रदेश सरकार और यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच पर्यटन सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह मौजूद रहे. एमओयू के तहत पर्यटन क्षेत्र में ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रचार अभियान, पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन मार्गों का विकास और दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने की दिशा में सहयोग किया जाएगा. समझौते में विशेष रूप से बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को शामिल किया गया है. इसके अलावा संयुक्त प्रचार अभियान, प्रदर्शनियां, सेमिनार और डिजिटल सामग्री के माध्यम से दोनों प्रांतों के पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा.

एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के सारनाथ और जापान के फुजिसान से जुड़े यूनेस्को विश्व धरोहर मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी सहमति बनी है. इसके साथ ही भविष्य में दोनों क्षेत्रों के बीच बौद्ध विरासत की बेहतर व्याख्या, बहुभाषी पर्यटक सुविधाओं, ध्यान और वेलनेस पर्यटन, आतिथ्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पेशेवर प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी.

अब वाराणसी और सारनाथ का दौरा
जापानी प्रतिनिधिमंडल की उत्तर प्रदेश यात्रा को प्रदेश की पर्यटन विविधता से परिचित कराने के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किया गया है. आगरा में ताजमहल और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने तथा लखनऊ में पर्यटन और उद्योग से जुड़े संवाद के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल वाराणसी और सारनाथ का दौरा करेगा. यहां काशी की आध्यात्मिक परंपराएं, गंगा आरती और सारनाथ की बौद्ध विरासत जापानी मेहमानों को भारत और जापान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रिश्तों से रूबरू कराएंगी.

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