यूपी बोर्ड की कोई वेबसाइट अगर आपके मार्कशीट में नंबर बढ़ाने या डिग्री में संशोधन कराने का कोई दावा करे तो सावधान हो जाइए. ऐसी वेबसाइटें पूरी तरह फर्जी हैं और इन्हें UP बोर्ड से मिलते-जुलते नामों से बनाया गया है. प्रयागराज की साइबर सेल ने इस बड़े साइबर खेल का भंडाफोड़ करते हुए आजमगढ़ के शशि प्रकाश और मनीष राय को गिरफ्तार किया है.
फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगे जा रहे थे छात्र
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी एक कॉल सेंटर चलाते थे और वहां से छात्रों को लुभावने ऑफर दिए जाते थे. वह खुद बनाई गई फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से दावा करते थे कि वे यूपी बोर्ड की मार्कशीट में नंबर बढ़ा सकते हैं या डिग्री में बदलाव कर सकते हैं. छात्र जैसे ही इनकी बातों में आते, उनसे ऑनलाइन भुगतान लिया जाता और बाद में फर्जी मार्कशीट कोरियर से उनके घर भेज दी जाती.
IPS राज कुमार मीणा की टीम ने की कार्रवाई
DCP कुलदीप सिंह गुनावत के निर्देशन में IPS राज कुमार मीणा ने एक विशेष टीम तैयार की और आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी और फील्ड इनपुट का सहारा लिया. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को पता चला कि जिन वेबसाइटों को सरकारी बताकर प्रचार किया जा रहा था. वह पूरी तरह निजी स्तर पर बनाई गई फर्जी पोर्टल थीं. इसके बाद पुलिस टीम ने कड़ी निगरानी और लगातार ट्रैकिंग के आधार पर दोनों आरोपियों को आजमगढ़ से गिरफ्तार कर लिया.
5 से 10 हजार रुपये लेकर भेजी जाती थीं फर्जी मार्कशीटें
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कुबूल किया कि वे हर नकली मार्कशीट के बदले छात्रों से 5 से 10 हजार रुपये तक वसूलते थे. यह पैसा दोनों आपस में बांट लेते थे. पकड़े गए लोगों द्वारा भेजी गई सभी डिग्रियां और मार्कशीटें पूरी तरह फर्जी होती थीं और UP बोर्ड से उनका कोई संबंध नहीं था.
7 हजार से अधिक फर्जी मार्कशीटें बांट चुके थे आरोपी
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने अब तक 7,000 से अधिक फर्जी मार्कशीटें छात्रों को भेजी थीं और इस पूरे गोरखधंधे से लाखों रुपये कमा चुके थे. कॉल सेंटर की छापेमारी में पुलिस को बड़ी संख्या में फर्जी मार्कशीटें, कॉलेजों की नकली डिग्रियां, कंप्यूटर सिस्टम और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं.
पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी तरह की मार्कशीट सुधार, संशोधन या नंबर बढ़ाने का दावा करने वाली वेबसाइटों से दूरी बनाएं, क्योंकि UP बोर्ड ऐसी कोई सेव ऑनलाइन उपलब्ध नहीं कराता.
(रिपोर्ट- पंकज श्रीवास्तव)
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