नदियों की बायोडायवर्सिटी को कायम रखने और उनमें अच्छी किस्म की मछलियों की मौजूदगी को बरकरार रखने को लेकर कई तरह क पहल की जा रही हैं. उत्तर प्रदेश के चंदौली में भी ऐसी ही एक पहल सामने आई है. दरअसल, यहां पर प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे रिवर रैचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्वी गंगा नदी में तकरीबन डेढ़ लाख मछलियों के बीज को छोड़ा गया.
इस दौरान चंदौली की जिलाधिकारी ईशा दुहन ने विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में मछुआरों के साथ एक बैठक भी की और उन्हें मछली पालन संबंधित टिप्स भी दिए. आपको बता दें कि मछुआरों की मदद और नदियों की बायोडायवर्सिटी को बरकरार रखने के उद्देश्य से रिवर रैचिंग का कार्यक्रम चलाया जा रहा है.
प्रदूषण के चलते कम हो रही हैं मछलियां
रिवर रैचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत नदियों में मछलियों के बीच छोड़े जाते हैं ताकि नदियों में अच्छे किस्म की मछलियों की मौजूदगी भी बरकरार रहे. इसी कार्यक्रम के तहत चंदौली जनपद के बलुआघाट पर मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जिला प्रशासन द्वारा एक लाख चालीस हजार मत्स्य बीज गंगा नदी मे छोड़े गए.
दरअसल मछुआरों द्वारा नदियों में लगातार मछलियों के मारे जाने के साथ-साथ प्रदूषण के चलते नदियों में भारतीय मेजर कार्प प्रजाति की रोहू, नयन और भाकुर आदि प्रजाति की मछलियों की कमी हो रही है. जिसके चलते मछुआरों के सामने भी जीवन यापन का संकट उत्पन्न हो जाता है. इसी वजह से गरीब मछुआ समुदाय के व्यक्तियों के आजीविका के मद्देनजर भारतीय मत्स्य प्रजाति की मछलियों के संरक्षण के लिए प्रदेश में रिवर रैंचिंग कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है.
डीएम ने बढ़ाया मछुआरों का मनोबल
ईशा दुहन, जिलाधिकारी, चंदौली ने बताया कि बलुआ घाट पर रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत मत्स्य बीज गंगा नदी में सिंचाई के लिए डाले गए हैं. इसका उद्देश्य यह है कि अच्छी वैरायटी की मछलियां चाहे वह रोहू हो कतला हो या नयन हो, इन सब का अच्छा उत्पादन हो.
साथ ही नदी की बायोडायवर्सिटी भी बनी रहे. साथ ही, हमारे मछुआरा समुदाय नदी पर आश्रित हैं उनके लिए अच्छी वैरायटी की मछलियां डालना भी विभाग की जिम्मेदारी है.
(उदय गुप्ता की रिपोर्ट)