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जंगलों की आग बुझाने का 'मास्टरप्लान', जिले में खुले 23 पिरूल खरीद केंद्र, महिलाओं की आमदनी बढ़ाने की बड़ी पहल

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने एक अनोखी और प्रभावी पहल शुरू की है.

gnttv.com
  • बागेश्वर,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

गर्मियों के मौसम में पहाड़ी इलाकों में वनाग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं. ऐसे में उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है. वन विभाग ने जंगलों में आग की घटनाओं को नियंत्रित करने और ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पिरूल की खरीद शुरू कर दी है. जिले भर में इसके लिए कुल 23 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, जहां 10 रुपये प्रति किलो की दर से पिरूल खरीदा जा रहा है.

वनाग्नि रोकने के साथ रोजगार पर भी फोकस
वन विभाग का मुख्य उद्देश्य जंगलों में सूखी चीड़ की पत्तियों यानी पिरूल को समय रहते इकट्ठा करना है, क्योंकि यही पिरूल गर्मियों में आग फैलने की सबसे बड़ी वजह बनता है. विभाग ने इस पहल के जरिए दोहरे लाभ पर काम किया है. एक तरफ जंगलों को आग से बचाने की कोशिश की जा रही है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए कमाई का रास्ता खोला गया है.

इसके लिए महिला मंगल दल, नवयुवक मंगल दल और स्वयं सहायता समूहों को पिरूल इकट्ठा कर बेचने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ेगी और उन्हें गांव में ही काम मिल सकेगा. पिरूल से तैयार होने वाले ब्रिकेट्स का उपयोग आगे चलकर कई कामों में किया जा सकता है, जैसे चेकडैम निर्माण और अन्य उपयोगी कार्यों में.

जिले में 23 स्थानों पर बनाए गए खरीद केंद्र
वन विभाग ने जिले के अलग-अलग रेंज में पिरूल खरीद केंद्र स्थापित किए हैं. बागेश्वर रेंज में जौलकांडे वन परिसर, नक्षत्र वाटिका लकड़ियाथल, छतीना पौधालय, हर्बल गार्डन कठायतबाड़ा, कनगाड़छीना, झिरौली और वन रक्षक चौकी कनगाड़छीना शामिल हैं.

वहीं बैजनाथ रेंज में सिरकोट, कौसानी, महरपाली, पोखरी और बज्वाड़ में केंद्र बनाए गए हैं. गढ़खेत रेंज में जिंतोली, वज्यूला, गढ़खेत, जखेड़ा और कुलांऊ में पिरूल संग्रहण की व्यवस्था की गई है.

इसके अलावा कपकोट रेंज के जखेड़ी और कालीधार कंपाट संख्या दो में भी खरीद होगी. धरमघर रेंज में देवतोली, सनीउडियार, दोफाड़, खेती, कांडा, लेटला, चौकोड़ी और बैड़ा को भी इस योजना में शामिल किया गया है.

प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने बताया कि वनाग्नि को लेकर वन विभाग, तहसील प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम के साथ बैठक की गई है. क्विक रिस्पांस टीम (QRT) भी पूरी तरह तैयार है और अलर्ट मिलते ही संयुक्त टीम मौके पर पहुंच रही है.

उन्होंने बताया कि वन विभाग ने 200 टन पिरूल संग्रहण का लक्ष्य रखा है और प्रति किलो 10 रुपये महिलाओं को भुगतान किया जाएगा. लक्ष्य बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को भी प्रस्ताव भेजा गया है. प्रशासन का कहना है कि वनाग्नि रोकथाम और पिरूल संग्रहण, दोनों मोर्चों पर पूरी तैयारी की गई है.

(रिपोर्ट- जगदीश चंद्र पांडे) 

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