Varanasi Flood: वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. पक्के घाटों को डुबोने के बाद बाढ़ का पानी अब आसपास की गलियों तक पहुंच गया है. इसका सबसे ज्यादा असर मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिल रहा है. काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के सभी शवदाह पानी में डूब चुके हैं. ऐसे में अब ऊंची छत पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है. यहां एक बार में करीब 20 शवों का ही अंतिम संस्कार हो पा रहा है. इससे शवयात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है.
एक चिता की राख ठंडी भी नहीं हो पाती कि दूसरी चिता सजानी पड़ रही
कहते हैं काशी में मौत भी मोक्ष बन जाती है और मणिकर्णिका घाट पर जलने वाली चिताओं की आग कभी ठंडी नहीं होती लेकिन आज मोक्षदायिनी मां गंगा के इस रौद्र रूप ने महाश्मशान की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी है. मणिकर्णिका घाट पर जलती हुई चिताओं के ठीक बीच खड़ा होकर अपने इर्द-गिर्द अपनों को अंतिम विदाई देते बेबस लोग हैं, आंखों में आंसू और चेहरे पर लाचारी दिखता है. गंगा का जलस्तर इतना बढ़ चुका है कि पूरा घाट जलमग्न हो चुका है, जिन गलियों में कभी पैदल चलना मुश्किल होता था, वहां आज नावें तैर रही हैं. ज़िंदगी में तो बाढ़ ने लोगों का आशियाना छीना ही, मौत के बाद भी सुकून से अंतिम विदाई मयस्सर नहीं हो पा रही है. घाट डूबने के बाद अब मजबूरी में शवों का अंतिम संस्कार मकानों की छतों पर और संकरी गलियों में किया जा रहा है. एक चिता की राख ठंडी भी नहीं हो पाती कि दूसरी चिता सजानी पड़ रही है. धधकती आग, चारों तरफ फैला बाढ़ का पानी और उठता धुआं... आज मणिकर्णिका की ये तस्वीरें इंसान की बेबसी और प्रकृति के रौद्र रूप की सबसे दर्दनाक गवाही दे रही हैं.
अतिरिक्त व्यवस्था करने की मांग
शव लेकर पहुंचे लोगों का कहना है कि जगह की कमी के कारण उनका नंबर जल्दी नहीं लग पा रहा है. उन्हें संकरी गलियों और मुश्किल रास्तों से होकर घाट तक पहुंचना पड़ रहा है. लोगों ने प्रशासन से अतिरिक्त व्यवस्था करने की मांग की है. बाढ़ का असर लकड़ी के कारोबार पर भी पड़ा है. गंगा के रास्ते लकड़ी की सप्लाई बंद होने से कीमतों में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है.
कई मंदिर और देवालय पूरी तरह जलमग्न
गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों और आसपास बने मंदिरों तक पहुंच चुका है. कई मंदिर और देवालय पूरी तरह जलमग्न दिखाई दे रहे हैं. घाटों के बीच संपर्क भी टूट गया है. गंगा किनारे घूमने पहुंचे विदेशी पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बाढ़ का असर दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती पर भी पड़ा है. विश्वप्रसिद्ध संध्या गंगा आरती को पीछे की तरफ शिफ्ट कर छत पर करना पड़ा है. दशाश्वमेध घाट पर गंगा का पानी लगातार ऊपर आ रहा है. वहां बनी जल पुलिस की चौकी आधी से ज्यादा पानी में समा गई है. हालांकि, सावन की वजह से कांवड़िए वहीं पर स्नान कर रहे हैं और हर हर महादेव का जय घोष कर रहे हैं.अस्सी घाट पर भी पानी लगातार बढ़ रहा है. नावों का संचालन बंद करा दिया गया है. बनारस में लगातार बारिश के बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के एंट्री गेट से लेकर कॉलेज के अंदर तक घुटने तक पानी भर गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि कई क्लासेस जलभराव के चलते रद्द हो गई हैं. जलभराव के बीच बीएचयू से मरीज को लेकर एम्बुलेंस भी निकल रही है.