बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देने के लिए 'कृषि इनपुट अनुदान' योजना की शुरूआत की है. इस योजना का उद्देश्य उन किसानों की आर्थिक मदद करना है, जिनकी फसल बारिश, गंगा और कोसी नदी के बढ़ते जल स्तर के कारण खराब हो जाती है. इस योजना के लिए वह किसान ही आवेदन कर सकते हैं, जिनकी फसल बारिश और बाढ़ के कारण 33 प्रतिशत से ज्यादा खराब हो गई है. इस योजना की आवेदन तिथि 5 मई निर्धारित की गई है. सरकार ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ पैमाना तय किया है. जानें किस आधार पर दी जाएगी किसानों को ये सब्सिडी.
बैंक खाते में आएगी राशि
सरकार ने इस योजना में 13 जिलों के 88 प्रखंडों के 1484 पंचायतों के किसानों को शामिल किया है. सरकार का कहना है कि सब्सिडी की सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डाल दी जाएगी. मतलब साफ है कि किसानों को कागजी तामझाम से राहत मिलेगा.
किन किसानों को मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ सभी पंजीकृत रैयत और गैर-रैयत प्रकार के किसानों को डायरेक्ट मिलेगा. इस योजना का लाभ केवल किसान और किसान परिवार उठा सकेंगे. योजना का लाभ उठाने के लिए रजिस्ट्रेशन के वक्त किसान को अपने परिवार का आधार सत्यापित करके देना अनिवार्य होगा.
कितनी मिलेगी राशि और कौन से जिलें हैं शामिल
फसल क्षेत्र के प्रकार के अनुसार अनुदान की अलग-अलग दरें तय की गई हैं. असिंचित यानी वर्षा पर निर्भर फसल क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्र के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और शाश्वत या बहुवर्षीय फसल, जिसमें गन्ना भी शामिल है, के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा.
अनुदान की न्यूनतम राशि भी श्रेणी के अनुसार निर्धारित की गई है. असिंचित क्षेत्र के किसानों को कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 2,500 रुपये का अनुदान मिलेगा. यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक के लिए ही मान्य होगी.
यह योजना राज्य के कई जिलों के किसानों के लिए लागू की गई है. इनमें सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, अररिया, बेगूसराय, मधुबनी, पूर्णिया, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, दरभंगा, सुपौल और भागलपुर शामिल हैं.
किसान इस योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 18001801551 पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा अपने जिले के जिला कृषि पदाधिकारी से भी जानकारी ली जा सकती है.
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