Census 2026: शुरू होने वाली है जनगणना, जानें क्या है जाति जनगणना, क्यों जरूरी और इसके नए नियम

What is Census: जनगणना किसी देश या विशिष्ट क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों को एक निश्चित समय पर एकत्र, संकलित और विश्लेषित करने की प्रक्रिया को कहा जाता है. वहीं जाती जनगणना की बात करें तो यह जनगणना का ही एक हिस्सा है.

जनगणना के नए नियम
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

भारत में आगामी जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक मकान सूचीकरण (House-listing) के रूप में होगा, जबकि मुख्य जनसंख्या गणना 2027 में होगी. इस बार लगभग 100 साल बाद विस्तृत जातिगत जनगणना (Caste Census) की जाएगी, जो देश में सामाजिक-आर्थिक नीतियों और आरक्षण के पुनर्मूल्यांकन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि आखिर क्या है जाति जनगणना, क्यों जरूरी है और इसके नए नियम क्या हैं.

जनगणना क्या है?
जनगणना किसी देश या विशिष्ट क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक आंकड़ों को एक निश्चित समय पर एकत्र, संकलित और विश्लेषित करने की प्रक्रिया को कहा जाता है. वहीं जाती जनगणना की बात करें तो यह जनगणना का ही एक हिस्सा है, जिसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अन्य सभी जातियों की विस्तृत गिनती की जाएगी. बता दें कि, 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब हर जाति के सटीक आंकड़े जुटाए जाएंगे. बता दें कि, जनगणना दो चरणों में होगी.

चरण 1 (1 अप्रैल 2026 - 30 सितंबर 2026): मकानों की सूची (House listing) और सुविधाओं की गणना.
चरण 2 (फरवरी 2027): वास्तविक जनसंख्या की गणना.
बर्फीले क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड): मकानों की सूची सितंबर 2026 और गणना 1 अक्टूबर 2026 से.

जनगणना क्यों जरूरी है?
नीति निर्धारण: सरकार विकास योजनाओं (राशन, स्कूल, अस्पताल, आवास) के लिए सटीक डेटा का उपयोग करती है.
परिसीमन: लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) के लिए.
सामाजिक-आर्थिक डेटा: जाति और समुदायों के आधार पर सुविधाओं तक पहुंच का पता लगाने के लिए.

जाति जनगणना क्यों जरूरी है?
सटीक डेटा: देश में हर जाति की सही आर्थिक और सामाजिक स्थिति का पता चलेगा.
आरक्षण का आधार: आरक्षित वर्गों की वर्तमान स्थिति के आधार पर आरक्षण प्रणाली की समीक्षा की जाने के लिए.
सामाजिक न्याय: पिछड़ी जातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए सटीक आंकड़े मिलेंगे.

जनगणना के नए नियम और प्रक्रिया
डिजिटल जनगणना: यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जो मोबाइल ऐप और टैबलेट का उपयोग करेगी. वहीं प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जाति की जानकारी स्वयं देनी होगी.

पूछे जाने वाले सवाल:
नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति/उप-जाति.
घर का मुखिया कौन है?
मकान का स्वामित्व (खुद का या किराये का)?
घर में उपलब्ध सुविधाएं: पीने का पानी, बिजली, शौचालय, रसोई, LPG/PNG कनेक्शन.
संपत्ति, मोबाइल, इंटरनेट, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार, टीवी, रेडियो.
परिवार के सदस्यों की संख्या और विवाहित जोड़ों की संख्या के बारे में.

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