पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर की बेटी अनाया बांगड़ ने थाईलैंड में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी कराई है. उन्होंने अस्पताल से अपनी तस्वीर पोस्ट कर इस सफर को इमोशनल बताया. अनाया का जन्म आर्यन बांगड़ के रूप में हुआ था, अब वो एक ट्रांसजेंडर महिला के रूप में अपनी पहचान जी रही हैं.
क्या होती है जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी
जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति के शरीर में बदलाव किए जाते हैं ताकि वह उसकी असली जेंडर पहचान (लड़का या लड़की जैसा वह खुद को महसूस करता/करती है) से मेल खा सके.
कुछ लोग जन्म से जो शरीर लेकर आते हैं, वह उनकी अंदर की पहचान से अलग होता है. जैसे कोई व्यक्ति जन्म से लड़का हो, लेकिन खुद को लड़की महसूस करता हो. इस अंतर को ही जेंडर डिस्फोरिया कहा जाता है, जिससे मानसिक परेशानी हो सकती है.
हालांकि, हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति सर्जरी नहीं करवाता. कई लोग हार्मोन थेरेपी, काउंसलिंग या सामाजिक ट्रांजिशन के जरिए भी अपनी पहचान के साथ जीते हैं.
किस तरह की सर्जरी होती है
जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी व्यक्ति की जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.
ट्रांसजेंडर महिलाओं (जिनका जन्म पुरुष के रूप में हुआ) के लिए जननांग पुनर्निर्माण (genital reconstruction), ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन और चेहरे को महिला बनाने वाली सर्जरी.
ट्रांसजेंडर पुरुषों (जिनका जन्म महिला के रूप में हुआ) के लिए चेस्ट रीकंस्ट्रक्शन (टॉप सर्जरी), हिस्टेरेक्टॉमी और जननांग निर्माण (जैसे फालोप्लास्टी).
अनाया ने मुंबई और मैनचेस्टर, दोनों जगह क्लब क्रिकेट खेला है, लेकिन उनका क्रिकेट करियर ज्यादा लंबा नहीं चल पाया. मुंबई में क्लब स्तर पर खेलने के साथ-साथ, इंग्लैंड के मैनचेस्टर में भी उन्होंने काउंटी क्लब के लिए मैच खेले. एक मुकाबले में उन्होंने शानदार 145 रनों की पारी भी खेली थी.
क्रिकेट की शुरुआती ट्रेनिंग उन्हें अपने पिता संजय बांगड़ से ही मिली थी और वे मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से भी जुड़ी रही हैं. हालांकि, साल 2023 में हार्मोन थेरेपी शुरू करने के बाद उनका क्रिकेट करियर प्रभावित हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने क्रिकेट से दूरी बना ली.
सिर्फ सर्जरी नहीं, लंबी मेडिकल प्रक्रिया
जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी एक अकेली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक लंबा मेडिकल और भावनात्मक सफर होता है. इसमें सर्जरी से पहले हार्मोन थेरेपी, मेंटर हेल्थ काउंसलिंग होती है. हालांकि दुनियाभर में जेंडर-अफर्मिंग केयर को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन इसकी पहुंच अभी भी सीमित है. कई लोग बेहतर सुविधाओं के लिए विदेशों का रुख करते हैं.
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