राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ इन दिनों एक महिला सैन्य अधिकारी अक्सर नजर आती हैं. आधिकारिक समारोह हो या राष्ट्रपति भवन का कोई खास कार्यक्रम, मेजर नव्या शेखावत राष्ट्रपति के साथ दिखाई देती हैं. वह राष्ट्रपति की ADC यानी Aide-de-Camp हैं. खास बात यह है कि मेजर नव्या शेखावत राष्ट्रपति की ADC बनने वाली भारतीय थल सेना की पहली महिला अधिकारी हैं. हालांकि, तीनों सेनाओं की बात करें तो वह इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर मेजर नव्या शेखावत हैं कौन...
राष्ट्रपति की ADC की क्या होती है भूमिका?
राष्ट्रपति के पास परंपरागत रूप से पांच ADC होते हैं. इनमें तीन अधिकारी थल सेना, एक नौसेना और एक वायु सेना से होते हैं. इनकी जिम्मेदारी सिर्फ राष्ट्रपति के साथ समारोहों में मौजूद रहने तक सीमित नहीं होती. ADC राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, सैन्य समारोहों और दूसरे औपचारिक आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वह सैन्य प्रोटोकॉल और कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी सहयोग करते हैं.
कौन हैं मेजर नव्या शेखावत?
मेजर नव्या शेखावत का सेना में आने का सफर UPSC की संयुक्त रक्षा सेवा यानी CDS परीक्षा से शुरू हुआ. परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला नॉन-टेक्निकल कोर्स की मेरिट लिस्ट में जगह बनाई.
इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में सैन्य प्रशिक्षण लिया. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें आर्मी सर्विस कॉर्प्स में कमीशन मिला. यह सेना की अहम शाखाओं में से एक है, जो सैन्य सामान की सप्लाई, परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े काम संभालती है. उन्हें करीब 2021 में कमीशन मिला था.
राष्ट्रपति की ADC बनने वाली दूसरी महिला अधिकारी
मेजर नव्या शेखावत राष्ट्रपति की ADC बनने वाली पहली महिला आर्मी अधिकारी हैं, लेकिन वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी नहीं हैं. उनसे पहले 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी ने राष्ट्रपति की ADC बनकर इतिहास रचा था. वह राष्ट्रपति की ADC बनने वाली पहली महिला अधिकारी थीं.
मेजर शेखावत की नियुक्ति भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के बढ़ते अवसरों को भी दिखाती है. सेना में महिलाओं की अधिकारी के तौर पर एंट्री 1990 के दशक की शुरुआत में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए हुई थी. इसके बाद नीतिगत बदलावों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से महिलाओं के लिए सेना में स्थायी कमीशन समेत कई रास्ते खुले. अब मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति इस बदलाव की एक और बड़ी मिसाल बन गई है.
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