आईपीएस अफसर की नौकरी, एक ऐसी नौकरी है जिसका सपना तो हर कोई देखता है. लेकिन मिल केवल कुछ को ही पाती है. दरअसल गुजरात सरकार ने 2025 में राज्य के पुलिस विभाग में अदला-बदली की. इस दौरान एक नाम ऐसे सामने आया जिसकी कहानी सुन सभी हैरत में पड़ जाते हैं.
यह कहानी है सफीन हसन की, जो वर्तमान समय में महीसागर जिले में बतौर एसपी तैनात हैं. हसन भारत के सबसे कम उम्र वाले युवा आईपीएस है. उन्होंने केवल 22 वर्ष की उम्र में यूपीएसससी की परीक्षा को पास कर लिया, लेकिन इस सफलता के पीछे के संघर्ष की कहानी भी काफी कुछ बोलती है.
मुश्किल हालातों से लड़ाई..
सफीन हसन का जन्म 21 जुलाई 1995 को गुजरात में हुआ. उनके माका-पिता दोनों ही डायमंड उद्योग में काम करते थे. लेकिन आर्थिक हालातों के बदलने के कारण घर के भी हालात बदल गए. जिसके बाद बेटे की पढ़ाई का ज़िम्मा उठाते हुए मां ने लोगों के घरों में खाना बनाना शुरू किया तो वहीं पिता ने बतौर लेबर काम किया. जिसके बाद परिवार शाम के समय में उबले हुए अंडो का ठेला लगाया करता था.
पढ़ाई में स्कूल ने थामा हाथ
हसन एक होनहार छात्र रहे हैं. लेकिन उनके परिवार की आर्थिक हालत स्कूल से नहीं छिप पाई. जिसके बाद स्कूल ने 11वीं और 12वीं कक्षा में हसन की ट्यूशन फीस को माफ कर दिया. जिससे परिवार को काफी सहारा मिल पाया. लेकिन सवाल यही उठता है कि हसन के मन में आईपीएस बनने के ख्याल कैसे आया?
दरअसल यह अहम फैसला हसन ने स्कूल के दिनों में ही ले लिया. एक दिन उनके स्कूल में डिस्ट्रिट कलेक्टर ने विजिट किया था, जिसके बाद उनके जीवन में बदलाव आ गया. अफसर को देखते हुए उन्होंने भी मन बना लिया था कि वह एक सरकारी मुलाज़िम बनेंगे.
परिजनों का साथ, अंग्रेजी का उड़ा मज़ाक
सफीन हसन ने 10वीं और 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. जिसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने सरदार वल्लभबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया. यहां भी उनको आर्थिक रूप से मदद करने के लिए उनके परिजन आगे आए. लेकिन उनकी दिक्कते केवल यहीं तक सीमीत नहीं थी. कॉलेज में उनकी अंग्रेजी का काफी मज़ाक बनाया जाता था. लेकिन उन्होंने इससे भी हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत कर अपनी अंग्रेजी को सुधारा. जिसके बाद यूपीएससी के इंटरव्यू के समय तक वह भाषा पर काफी अच्छी पकड़ बना चुके थे.
यूपीएससी की राह भी नहीं आसान
सफीन हसन के लिए यूपीएससी का राह भी आसान नहीं है. 2017 में अपने पहले यूपीएससी एग्जाम के दिन उनका रोड़ एक्सीडेंट हो गया. जिसके बाद उन्हें कई जगह चोट आई. साथ ही कई सर्जरी भी हुई. ऐसा होने के बाद कई उम्मीदवार उम्मीद छोड़ देने हैं, लेकिन सफीन की जिद्द ने उन्हें सीधा परीक्षा केंद्र पहुंचाया और दर्द के बावजूद परीक्षा दी. जिसके बाद वह अस्पताल गए.
बिना यूनिफॉर्म भी करते हैं काम
बेशक वह यूनिफॉर्म में एक सरकारी मुलाजिम हो, लेकिन बिना यूनिफॉर्म भी वह समाज के लिए कई काम करते रहते हैं. वह कई एनजीओ के साथ मिलकर स्लम में बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं. वह इस काम को इसलिए भी करते हैं क्योंकि वह इन हालातों से गुज़र चुके हैं.